अरहर दाल के दाम बढ़े (सोर्स: AI)
मुंबई

त्योहारों पर पड़ेगी महंगाई की मार! दाल-रोटी भी महंगी; महाराष्ट्र-कर्नाटक में मौसम ने बढ़ाई चिंता

Arhar Dal Price Rise In Maharashtra: अरहर के अंतरराष्ट्रीय भाव में तेजी से भारत में आयात लागत बढ़ रही है। महाराष्ट्र-कर्नाटक में मौसम की चिंता के बीच त्योहारों पर दाल महंगी होने की आशंका है।

सूर्यप्रकाश मिश्र, आलोक उमाकृष्ण

Arhar Dal Price Rise Import Cost: त्योहारों के मौसम में आम उपभोक्ता की रसोई का बजट एक बार फिर बिगड़ सकता है। अरहर के अंतरराष्ट्रीय भाव में लगातार तेजी के संकेतों ने भारतीय दाल बाजार में महंगाई की आशंका बढ़ा दी है।

भारत में भी अनियमित बरसात के अलावा अफ्रीकी देशों में दाल की फसल कमजोर रहने की खबरों और निर्यातकों की ओर से बढ़ाए गए ऑफर के चलते भारत के लिए आयात लागत लगातार बढ़ रही है। यदि घरेलू फसल पर भी मौसम की मार पड़ती है, तो आने वाले महीनों में अरहर के भाव में और तेजी देखने को मिल सकती है।

एक सप्ताह में 8 फीसदी तक तेजी

कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के उपाध्यक्ष एवं ठाणे जिला होलसेल व्यापारी वेलफेयर महासंघ के अध्यक्ष सुरेशभाई ठक्कर ने बताया कि मोजाम्बिक से भारत के लिए गजरी अरहर का सितंबर-अक्टूबर शिपमेंट ऑफर बढ़कर 800 डॉलर प्रति टन CNF हो गया है। 17 सितंबर को यह 755 डॉलर था।

यानी एक सप्ताह में 45 डॉलर या करीब 6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। मौजूदा भाव चार सप्ताह के औसत 720 डॉलर से भी करीब 11 फीसदी ऊपर है। इसी तरह म्यांमार से लेमन टाइप अरहर का ऑफर 910 डॉलर प्रति टन पहुंच गया है, जो पिछले सप्ताह के 890 डॉलर से 20 डॉलर यानी करीब 2 फीसदी अधिक है।

यह चार सप्ताह के औसत 878 डॉलर से लगभग 4 फीसदी ऊपर है। सबसे तेज उछाल मलावी से आने वाली अरहर के भाव में दर्ज हुआ है। भारत के लिए इसका ऑफर 735 डॉलर प्रति टन हो गया है, जबकि पिछले सप्ताह यह 680 डॉलर था। यानी महज एक सप्ताह में 55 डॉलर या करीब 8 फीसदी की तेजी आई है। चार सप्ताह के औसत 641 डॉलर की तुलना में मौजूदा भाव करीब 15 फीसदी अधिक है।

महाराष्ट्र-कर्नाटक में मौसम बना चिंता का कारण

ठक्कर के मुताबिक महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख अरहर उत्पादक राज्यों में सूखे और जल संकट की स्थिति चिंता बढ़ा रही है। यदि आने वाले दिनों में पर्याप्त बारिश या सिंचाई की सुविधा नहीं मिली, तो फसल की उत्पादकता प्रभावित हो सकती है।

भारत और म्यांमार की नई अरहर फसल बाजार में आने में अभी करीब चार महीने का समय बाकी है। ऐसे में तब तक घरेलू बाजार को मौजूदा स्टॉक और आयात पर निर्भर रहना पड़ेगा। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय आयात भाव आने वाले महीनों में भारतीय बाजार की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण संकेतक बन सकता है।

वैसे देश में गेहूं का पर्याप्त स्टॉक होने के बावजूद तेजी का दबाव बढ़ा है। देश में आटे के रेट भी बढ़ रहे हैं। त्योहारों पर दाल रोटी भी महंगी होने से आम आदमी के घर का बजट बिगड़ने की संभावना है।

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