Antilia Bomb Scare Mansukh Hiren Murder Case: बहुचर्चित एंटीलिया बम केस और मनसुख हिरेन हत्याकांड में ट्रायल की प्रक्रिया अब आगे बढ़ने वाली है। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने विशेष अदालत को बताया है कि वह मामले की सुनवाई के दौरान मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह समेत 23 गवाहों के बयानों को अभियोजन साक्ष्य के तौर पर पेश नहीं करेगी।
जांच एजेंसी ने विशेष अदालत के सामने उन गवाहों और दस्तावेजों की विस्तृत सूची पेश की है, जो जांच के दौरान सामने आए थे, लेकिन 10 आरोपियों के खिलाफ औपचारिक सबूत के तौर पर इस्तेमाल नहीं किए जाएंगे। NIA की ओर से अप्रयुक्त साक्ष्यों की सूची अदालत में दाखिल की गई है।
अप्रयुक्त सामग्री में अगस्त 2021 से अगस्त 2022 के बीच दर्ज परमबीर सिंह के बयानों के अलावा दुबई स्थित टेलीग्राम एफजेड एलएलसी को भेजा गया नोटिस भी शामिल है। इसके अलावा आरोपियों के वॉयस सैंपल, हैंडराइटिंग पंचनामा और रेलवे सुरक्षा बल से जुड़े CCTV फुटेज की पत्राचार प्रतियां भी इस सूची में हैं।
NIA का यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मामले के आरोपियों में शामिल पूर्व पुलिस अधिकारी प्रदीप शर्मा ने अपने बचाव के लिए परमबीर सिंह के बयान की प्रति मांगी थी। बॉम्बे हाई कोर्ट में आरोपी सुनील माने की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान भी सिंह के बयान की उपलब्धता को लेकर सवाल उठ चुके हैं।
विशेष अदालत ने 1 अगस्त को मामले में सभी 10 आरोपियों के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय किए थे। इसके साथ ही मुकदमे का ट्रायल चरण शुरू हो गया है। आपराधिक प्रक्रिया के तहत अभियोजन पक्ष को अदालत के समक्ष यह स्पष्ट करना होता है कि वह किन साक्ष्यों पर भरोसा करेगा और किन सामग्री को अभियोजन के लिए इस्तेमाल नहीं करेगा।
NIA की ओर से अप्रयुक्त साक्ष्यों की सूची सौंपे जाने के बाद अब आरोपियों को मामले से संबंधित जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे बचाव पक्ष को अपने मामलों की तैयारी में मदद मिलेगी और मुकदमे की अगली कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत अब अभियोजन की ओर से पेश किए जाने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्यवाही करेगी।