Anna Hazare Silent Protest Ahilyanagar: सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने दिल्ली में चल रहे छात्र आंदोलन के समर्थन में गुरुवार को करीब दो घंटे का मौन धरना दिया। लगभग 14 वर्ष बाद किसी सार्वजनिक आंदोलन में शामिल हुए अन्ना का यह कार्यक्रम अहिल्यानगर के वाडिया पार्क में आयोजित हुआ। सुबह 11 बजे शुरू हुआ मौन आंदोलन दोपहर 1 बजे समाप्त हुआ। इसके बाद अन्ना अपने गांव रालेगण सिद्धि लौट गए।
महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने मौन धरने के बाद अन्ना हजारे ने सरकार से छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने और बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संवाद सबसे प्रभावी रास्ता है और असंतोष का समाधान संवेदनशीलता व जवाबदेही के साथ किया जाना चाहिए।
धरने से पहले अन्ना हजारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिख चुके हैं। पत्र में उन्होंने छात्र आंदोलन के दौरान हिंसा और पुलिस कार्रवाई की खबरों को बेहद पीड़ादायक बताया था। उन्होंने कहा था कि प्रदर्शनकारियों के असंतोष को केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि समाज की वास्तविक पीड़ा के रूप में देखा जाना चाहिए।
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अपने पत्र में अन्ना हजारे ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री का नाम लिए बिना कहा था कि यदि किसी मंत्री की जवाबदेही तय करते हुए इस्तीफा लिया जाता है तो इससे सरकार कमजोर नहीं होती। बल्कि इससे शासन व्यवस्था अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनती है तथा अन्य मंत्रियों को भी जिम्मेदारी का स्पष्ट संदेश मिलता है।
अन्ना ने पत्र में लिखा कि प्रदर्शनकारियों के असंतोष को कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं, बल्कि समाज की पीड़ा के रूप में देखा जाना चाहिए। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का नाम लिए बगैर उन्होंने कहा कि किसी मंत्री के इस्तीफे से सरकार नहीं गिरेगी, बल्कि कामकाज अधिक जवाबदेह बनेगा। अन्ना हजारे ने नीट परीक्षा में पेपर लीक और गड़बड़ियों का जिक्र करते हुए 22 छात्रों की आत्महत्या पर चिंता जताई। उन्होंने सरकार से प्रदर्शनकारियों से धैर्यपूर्वक बातचीत करने की अपील की।