आनंद दुबे (सोर्स: सोशल मीडिया)  
मुंबई

चोरी की बात उठाने वाले क्या औरंगजेब के वंशज हो गए? राम मंदिर दान चारी विवाद पर भड़के ठाकरे गुट के आनंद दुबे

Anand Dubey Statement: शिवसेना ठाकरे गुट के नेता आनंद दुबे ने कहा कि चोरी का मुद्दा उठाने वालों को 'औरंगजेब का वंशज' कहना पूरी तरह गलत है। चोर, चोर होता है और संत, संत होता है।

गोरक्ष पोफली

Anand Dubey Attacks BJP: शिवसेना यूबीटी के प्रवक्ता आनंद दुबे ने आगामी मानसून सत्र, राम मंदिर दान विवाद, एनसीईआरटी पेपर खरीद मामले में जांच के आदेश और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर केंद्र सरकार पर जुबानी हमला किया। उन्होंने कहा कि संसद में महंगाई, बेरोजगारी, किसान, युवाओं और महिला सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए और सरकार को विपक्ष की बात सुननी चाहिए।

राम मंदिर दान विवाद पर आनंद दुबे ने कहा कि भगवान राम करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं और यदि उनके मंदिर के दान पात्र में चोरी हुई है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इस मुद्दे को उठाने वालों को 'औरंगजेब का वंशज' कहना पूरी तरह अनुचित है। अगर चोरी की बात उठाने वाला औरंगजेब का वंशज है, तो क्या चोरी करने वाले साधु-संतों के वंशज हो गए? चोर, चोर होता है और संत, संत होता है। भाजपा नेता नितेश राणे पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें स्पष्ट करना चाहिए कि उनके बयान का वास्तविक आशय क्या था। उन्होंने आरोप लगाया कि जो भी चोरी करने वालों को बचाता है, वह भी उतना ही दोषी है और जनता अब यह समझ चुकी है कि भगवान राम का सच्चा भक्त कौन है और भ्रष्टाचार का संरक्षण कौन कर रहा है।

धर्मेंद्र प्रधान नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दें

एनसीईआरटी पेपर खरीद मामले में जांच के आदेश पर आनंद दुबे ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हर बार किसी गड़बड़ी के बाद केवल जांच के आदेश देना पर्याप्त नहीं है। जब एनटीए में गड़बड़ी होती है तो जांच बैठा दी जाती है, एनसीईआरटी में मामला सामने आता है, तो भी जांच का ऐलान कर दिया जाता है, लेकिन मंत्रालय अपनी जवाबदेही तय नहीं करता। जिस विभाग पर आरोप है, उसी विभाग से जांच कराना निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है। धर्मेंद्र प्रधान को तो नैतिकता के आधार पे इस्तीफा दे देना चाहिए।

टकराव की राजनीति छोड़ जनता के मुद्दों पर संवाद करें सरकार और विपक्ष

20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र पर आनंद दुबे ने कहा कि सभी राजनीतिक दलों को जनता से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा करनी चाहिए। देश में लगातार बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं, महिला सुरक्षा, युवाओं की परेशानियां और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का असर आम जनता पर पड़ रहा है। उन्होंने नीट परीक्षा से जुड़े विवादों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि इन विषयों पर संसद में विस्तृत बहस होनी चाहिए। सरकार और विपक्ष को टकराव की राजनीति से ऊपर उठकर संवाद करना चाहिए।

प्रधानमंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता एक साथ बैठकर बातचीत करें, जिससे लोकतांत्रिक माहौल मजबूत हो। सर्वदलीय बैठक केवल औपचारिकता न बने, बल्कि सभी दलों की राय को समान महत्व दिया जाए। जब सरकार अहंकार में आ जाती है और उसकी नीतियों से जनता प्रभावित होती है, तब विपक्ष की जिम्मेदारी सरकार को जवाबदेह बनाना होती है। मजबूत विपक्ष किसी भी लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत होता है।

चुनाव आयोग की पारदर्शिता और नियुक्तियों पर उठाए सवाल

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी की पुस्तक में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा चुनाव आयोग को लोकतंत्र की आत्मा बताए जाने के संदर्भ पर आनंद दुबे ने कहा कि पहले चुनाव आयोग की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर व्यापक विश्वास था, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में उस भरोसे पर सवाल उठ रहे हैं। अतीत और वर्तमान में अंतर होता है और संस्थाओं का मूल्यांकन उनके मौजूदा कामकाज के आधार पर होना चाहिए।

पहले चुनाव आयुक्त सेवानिवृत्ति के बाद सार्वजनिक जीवन से अलग रहते थे, जबकि अब अलग-अलग पदों पर नियुक्तियों को लेकर सवाल उठते हैं।

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