Akash Fundkar On Labour Code Rules: केंद्र सरकार द्वारा बनाई गई चार नई श्रमसंहिताओं को लेकर महाराष्ट्र में हिंद मजदूर सभा और कर्मचारी संगठनों की संयुक्त कृती समिति के कड़े विरोध को बड़ी सफलता मिली है।
राज्य के श्रम मंत्री एडवोकेट आकाश फुंडकर ने स्पष्ट आश्वासन दिया है कि जब तक सभी कामगार संगठनों से विस्तृत चर्चा नहीं हो जाती और उनके सुझावों व आपत्तियों को शामिल कर संयुक्त रिपोर्ट केंद्र सरकार को नहीं भेज दी जाती, तब तक महाराष्ट्र में श्रमसंहिता के नियम लागू नहीं किए जाएंगे।
हिंद मजदूर सभा के महासचिव संजय वढावकर ने बैठक में सरकार के सामने मजबूती से पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि चारों श्रमसंहिताओं की कई धाराएं सीधे तौर पर कामगारों के हितों पर चोट करती हैं।
इन नियमों से स्थायी नौकरियों में कटौती, यूनियन बनाने के अधिकार पर रोक, वेतन सुरक्षा कमजोर होने और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर प्रतिकूल असर पड़ने का खतरा है।
वढावकर ने कहा, 'राज्य सरकार एकतरफा नियम नहीं थोप सकती। किसी भी स्थिति में अगर कामगारों के हितों को नुकसान पहुंचता है तो ऐसे नियम स्वीकार नहीं होंगे। पहले यूनियनों से बातचीत हो, फिर ही आगे का निर्णय लिया जाए।'
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कृती समिति की इस मांग पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए राज्य के श्रम मंत्री आकाश फुंडकर ने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार सभी श्रमिक संगठनों को विश्वास में लेकर ही आगे बढ़ेगी।
उन्होंने कहा कि संगठनों से मिले इनपुट के आधार पर एक संयुक्त रिपोर्ट तैयार कर केंद्र को भेजी जाएगी। तब तक राज्य में नए नियमों की अधिसूचना जारी नहीं होगी। इस सफलता पर कृती समिति ने राज्यभर के कामगारों को बधाई दी है।
समिति ने मांग की है कि आगे होने वाली चर्चाओं में सभी मान्यता प्राप्त यूनियनों को शामिल किया जाए ताकि कामगार हितैषी और संतुलित नियम बन सकें। संगठनों का मानना है कि श्रम कानूनों में बदलाव करते समय रोजगार सुरक्षा, न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है।