Abu Salem Premature Release Plea Rejected: 1993 के मुंबई बम धमाकों के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे कुख्यात गैंगस्टर अबू सलेम को सर्वोच्च अदालत से बहुत बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने अबू सलेम की उस याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया है, जिसमें उसने समय से पहले रिहाई प्रीमैच्योर रिलीज दिए जाने की मांग की थी।
सर्वोच्च अदालत के इस फैसले के बाद यह पूरी तरह साफ हो गया है कि कुख्यात गैंगस्टर अबू सलेम को फिलहाल जेल की सलाखों के पीछे ही रहना पड़ेगा और वह साल 2030 से पहले जेल से बाहर नहीं आ सकेगा।
यह महत्वपूर्ण फैसला न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट के अप्रैल 2025 के आदेश को बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया कि अबू सलेम की 25 साल की सजा की अवधि नवंबर 2030 में पूरी होगी। इसलिए, समय से पहले रिहाई की मांग करने वाली उसकी याचिका पूरी तरह से प्रीमैच्योर और निराधार है।
अबू सलेम ने अदालत में दलील दी थी कि 17 दिसंबर 2002 को भारत सरकार ने पुर्तगाल से उसके प्रत्यर्पण के समय यह आधिकारिक आश्वासन दिया था कि उसे न तो मृत्युदंड दिया जाएगा और न ही 25 साल से अधिक जेल में रखा जाएगा।
सलेम का दावा था कि वह नवंबर 2005 में अपनी गिरफ्तारी के बाद से लगभग 11 साल 9 महीने विचाराधीन कैदी के रूप में और करीब 9 साल 10 महीने दंडित कैदी के रूप में जेल में बिता चुका है। इसके अलावा, उसने अच्छे आचरण के कारण मिली लगभग 3 साल 2 महीने की छूट को भी जोड़ने की मांग की थी और कहा था कि इस तरह उसकी 25 साल की अवधि पूरी हो चुकी है।
सुप्रीम कोर्ट ने सलेम की इन तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि प्रत्यर्पण संधि के तहत तय की गई 25 साल की अधिकतम सीमा अपने आप में उम्रकैद की सजा में दी गई एक बड़ी राहत है। जेल नियमों के तहत मिलने वाली सामान्य छूट का इस्तेमाल इस 25 साल की निर्धारित सीमा को और कम करने के लिए नहीं किया जा सकता।
अदालत ने स्पष्ट किया कि सलेम की 25 साल की कैद की गणना उसकी गिरफ्तारी की तारीख 11 नवंबर 2005 से ही की जाएगी, जो नवंबर 2030 में समाप्त होगी।