प्रताप सरनाईक Vs नरेंद्र मेहता (सौ. डिजाइन फोटो ) 
महाराष्ट्र

मीरा-भाईंदर में फर्जी ऑटो परमिट घोटाले पर सियासी घमासान, 28 संदिग्धों पर कार्रवाई शुरू

Mira Bhayandar Fake Auto Permit Scam: मीरा-भाईंदर में फर्जी दस्तावेजों के जरिए ऑटो परमिट और आरटीओ बैच हासिल करने के मामले ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। 28 लोगों के दस्तावेज संदिग्ध पाए गए हैं।

अपूर्वा नायक

Mira Bhayandar Fake Auto Permit Scam News Update: मीरा भाईंदर में फर्जी ऑटो-रिक्शा परमिट और आरटीओ बैच घोटाले को लेकर स्थानीय राजनीति में जबरदस्त घमासान मच गया है।

भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने आक्रामक अंदाज में जवाब देते हुए परिवहन विभाग का बचाव किया और आरोपों को अधूरी जानकारी पर आधारित बताया।

दरअसल, विधायक नरेंद्र मेहता ने आरोप लगाया था कि मीरा-भाईंदर में कुछ लोगों ने फर्जी जन्म प्रमाण पत्र, बनावट निवास प्रमाण पत्र, बिजली बिल, राशन कार्ड और पुलिस अनापत्ति प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेजों के आधार पर ऑटो-रिक्शा परमिट और आरटीओ बैच हासिल किए हैं।

प्रताप सरनाईक ने दिए उच्च स्तरीय जांच के आदेश

इस शिकायत के बाद परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने तत्काल उच्च स्तरीय जांच के आदेश जारी किए। मंत्री सरनाईक ने बताया कि "आपले सरकार" पोर्टल के माध्यम से जारी निवास प्रमाण पत्र, पुलिस वेरिफिकेशन रिपोर्ट, ऑनलाइन आवेदन और अन्य दस्तावेजों की गहन जांच शुरू की गई। इसी के तहत 13 अप्रैल को परिवहन विभाग ने तहसीलदार को पत्र भेजकर दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया प्रारंभ की थी। जांच में करीब 28 लोगों के दस्तावेज संदिग्ध पाए गए, जिनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज

मंत्री ने इन संदिग्ध परमिट धारकों के परमिट तत्काल निलंबित करने के निर्देश भी दिए हैं और संबंधित प्रस्ताव सचिव स्तर पर मंजूरी के लिए भेजा जा चुका है। बता दें कि काशीगांव पुलिस स्टेशन में भी 28 लोगों के खिलाफ फर्जी दस्तावेजों के जरिए सरकारी अनुमति और लाइसेंस प्राप्त करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है।

इसके बाद मंत्री सरनाईक और विधायक मेहता बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। सरनाईक ने मेहता पर निशाना साधते हुए कहा कि परिवहन विभाग केवल अन्य सरकारी विभागों द्वारा प्रमाणित दस्तावेजों के आधार पर परमिट और बैच जारी करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निवास प्रमाण पत्र राजस्व विभाग जारी करता है, जबकि पुलिस सत्यापन गृह विभाग के अंतर्गत आता है।

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