Maharashtra Specialist Doctors Original Posting: महाराष्ट्र सरकार ने सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए संवर्ग बदलकर अन्य पदों पर कार्यरत विशेषज्ञ डॉक्टरों को उनके मूल पदों पर वापस भेजने का फैसला लिया है।
30 जून 2026 से लागू होने वाले इस आदेश के तहत विशेषज्ञ चिकित्सा अधिकारियों को वर्तमान पदों से कार्यमुक्त कर उनकी शैक्षणिक योग्यता और विशेषज्ञता के अनुसार नई पदस्थापना की जाएगी।
सरकार का मानना है कि 'राइट डॉक्टर, राइट पोस्ट' के इस फॉर्मूले से जिला अस्पतालों से लेकर ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों तक विशेषज्ञ सेवाएं मजबूत होंगी और मरीजों को पहले से अधिक बेहतर, त्वरित और गुणवत्तापूर्ण उपचार मिल सकेगा।
सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव डॉ निपुण विनायक द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि कई अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति संवर्ग परिवर्तन के माध्यम से अन्य पदों पर किए जाने से विशेषज्ञ सेवाओं पर प्रतिकूल असर पड़ रहा था। मंजूर रचना के अनुसार अस्पतालों में विशेषज्ञों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
आदेश के तहत सवर्ग परिवर्तन कर कार्यरत विशेषज्ञ चिकित्सा अधिकारियों को 30 जून से कार्यमुक्त किया जाएगा, जबकि उनके मूल संवर्ग में पुनर्पदस्थापना संबंधी अलग आदेश जारी किए जाएंगे, सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन अधिकारियों को न्यायालय से स्थगन आदेश प्राप्त है, उन्हें कार्यमुक्त नहीं किया जाएगा, इसके अलावा संलग्न सूची के बाहर संवर्ग परिवर्तन कर कार्यरत अन्य एस-20 और एस-23 संवर्ग के अधिकारियों पर भी यह आदेश लागू रहेगा।
जुलाई 2026 से ऐसे अधिकारियों का वेतन संवर्ग बदले पदों से नहीं निकाला जाएगा। इस फैसले का असोसिएशन ऑफ मेडिकल ऑफिसर्स ने स्वागत किया है। संगठन ने सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर और प्रधान सचिव डॉ। निपुण विनायक का अभिनंदन करते हुए इसे दूरदर्शी और जनहितकारी निर्णय बताया।
एएमओ का कहना है कि लंबे समय से कई विशेषज्ञ डॉक्टर अपने मूल विषय के बजाय अन्य प्रशासनिक या अलग पदों पर कार्यरत थे, जिससे विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही थी। अब 'योग्य विशेषज्ञ, सही स्थान पर' की संकल्पना प्रभावी रूप से लागू होगी।
एएमओ के राज्य सचिव डॉ। अविनाश माधव दहिफले ने कहा कि इस निर्णय से जिला अस्पतालों, उपजिला अस्पतालों और ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य व्यवस्था को बड़ा बल मिलेगा। प्रशासन की संवेदनशीलता, पारदर्शिता और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति प्रतिबद्धता इस निर्णय से स्पष्ट दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था अधिक मजबूत हो रही है। इससे चिकित्सा अधिकारियों में नया उत्साह पैदा हुआ है।