Maharashtra September Weather Alert: महाराष्ट्र में पिछले दिनों से बारिश ने अपना मुंह मोड लिया था। लेकिन सितंबर माह की शुरुआत राहत और चिंता दाेनों लेकर आया है। राहत की बात यह है कि बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव क्षेत्र के कारण देश के कुछ हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। दूसरी ओर, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार सितंबर में देशभर में बारिश सामान्य से कम रह सकती है।
मौसम विभाग के मुताबिक सितंबर में देश में सामान्य बारिश का औसत 167.9 मिलीमीटर है, लेकिन इस बार बारिश इसके 91 प्रतिशत से कम रहने का अनुमान है। अगस्त में भी देशभर में बारिश सामान्य से 16 प्रतिशत कम रही। इतना ही नहीं, अगस्त 2026 का औसत तापमान 28.01 डिग्री सेल्सियस रहा, जो वर्ष 1901 के बाद सबसे अधिक बताया गया है।
ऐसे में महाराष्ट्र के लिए सितंबर का मौसम कैसा रहेगा और इसका खेती, पानी तथा जनजीवन पर क्या असर पड़ेगा? यह सवाल सबके मन में उठ रहा होगा। आइए जानते हैं महाराष्ट्र में कैसा रहेगा मौसम का हाल।
बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव क्षेत्र के कारण सितंबर के शुरुआती दिनों में विदर्भ में बारिश की गतिविधि बढ़ने की संभावना है। महाराष्ट्र के कुछ जिलों में अच्छी बारिश हो सकती है, जबकि कुछ क्षेत्रों में बारिश के बीच लंबा अंतर देखने को मिल सकता है। महाराष्ट्र के कई हिस्सों में बारिश सामान्य से कम रहने का खतरा अभी भी बना हुआ है।
विदर्भ के किसानों के लिए सितंबर की शुरुआती बारिश अहम साबित हो सकती है। सोयाबीन, कपास और दलहन जैसी खरीफ फसलों के लिए इस समय मिट्टी में पर्याप्त नमी बेहद जरूरी है। यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होती है तो फसलों को फायदा मिल सकता है। मिट्टी की नमी बढ़ने के साथ फसल की वृद्धि और दाना भरने की प्रक्रिया को भी मदद मिल सकती है।
सिंतबर की बारिश से किसानों को फायदे के साथ-साथ नुकसान भी दे सकती है। यदि लंबे समय तक बारिश न होने के बाद अचानक बहुत तेज और मूसलाधार बारिश होती है तो खेतों में पानी जमा होने का खतरा बढ़ जाएगा। इसके कारण फसल में रोग बढ़ सकते हैं, मिट्टी का कटाव हो सकता है और पोषक तत्व बह सकते हैं।
छत्रपति संभाजीनगर समेत पूरे मराठवाड़ा संभाग के लिए सबसे बड़ी चुनौती बारिश का असमान होना है। इस इलाके के लिए मौसम विभाग ने पहले ही सूखे का संकेत दिया है। यदि लगातार 10 से 15 दिन बारिश नहीं होती और उसके बाद केवल 1 से 2 दिन में बहुत अधिक बारिश हो जाती है, तो महीने का कुल आंकड़ा देखने में ठीक लग सकता है, लेकिन खेती के लिए ऐसी बारिश पर्याप्त नहीं होगी। सोयाबीन, कपास, तूर, मूंग और उड़द जैसी फसलों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।
सामान्य बारिश का मतलब यह नहीं है कि बाढ़ का खतरा कम हो गया है। मुंबई, ठाणे, पुणे, नासिक और नागपुर जैसे शहरों में यदि कुछ घंटों में बहुत अधिक बारिश होती है तो नाले भरने, सड़कों पर पानी जमा होने, यातायात प्रभावित होने और बिजली आपूर्ति में बाधा आने की स्थिति बन सकती है।
कोंकण तथा पश्चिमी घाट से लगे क्षेत्रों में अचानक तेज बारिश होने पर नदी-नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। पहाड़ी क्षेत्रों में मिट्टी खिसकने और रास्ते बंद होने का खतरा भी बढ़ सकता है।
रायगढ़, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग और घाट क्षेत्र के लोगों को तेज बारिश की चेतावनी मिलने पर नदी, नाले और पहाड़ी रास्तों के आसपास जाने से बचना चाहिए।
सितंबर के मौसम को देखते हुए किसानों को दो तरह की तैयारी करनी चाहिए। जिन क्षेत्रों में बारिश कम है, वहां पानी बचाने और सिंचाई की व्यवस्था करनी चाहिए। वहीं जिन इलाकों में भारी बारिश की संभावना है, वहां खेत से अतिरिक्त पानी निकालने की व्यवस्था पहले से तैयार रखनी चाहिए।
खेत में पानी 24 से 48 घंटे से ज्यादा जमा न होने दें।
भारी बारिश से पहले अनावश्यक खाद का उपयोग न करें।
सोयाबीन और कपास में रोग तथा कीटों की नियमित जांच करें।
उपलब्ध सिंचाई के पानी का सोच-समझकर उपयोग करें।
खेतों की मेड़ और जलनिकासी की व्यवस्था मजबूत रखें।
मौसम विभाग की जिला स्तर की चेतावनियों के अनुसार कृषि कार्यों की योजना बनाएं।
भारी बारिश के दौरान नदी या नाले को पार करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। जलभराव वाले रास्तों पर वाहन चलाने से बचना चाहिए। खुले बिजली के तारों से दूरी बनाए रखना जरूरी है।
आकाशीय बिजली के समय पेड़ के नीचे खड़े होने के बजाय सुरक्षित पक्की इमारत में रहना चाहिए। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को जरूरी दस्तावेज, दवाइयां, पीने का पानी और अन्य आवश्यक सामान सुरक्षित स्थान पर रखना चाहिए।