अमित शाह को पुष्पगुच्छ भेंट करते रवींद्र चव्हाण (सोर्स: सोशल मीडिया) 
महाराष्ट्र

शिंदे से खटास या कुछ और? रवींद्र चव्हाण की अमित शाह से गोपनीय मीटिंग, महाराष्ट्र में सियासी हलचल

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र में 31 जनवरी से पहले संभावित निकाय चुनावों के बीच बीजेपी अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण की अमित शाह से अचानक मुलाकात ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है।

आकाश मसने

Ravindra Chavan Amit Shah Meeting: 31 जनवरी से पहले संभावित मुंबई सहित राज्य की 26 महानगरपालिकाओं एवं जिला परिषदों के चुनाव की पृष्ठभूमि में राज्य की सत्तारूढ़ महायुति के प्रमुख नेताओं ने मतभेद कम करने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। मंगलवार को नागपुर में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, अजित पवार एवं बीजेपी महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण सहित अन्य नेताओं की उपस्थिति में हुई बैठक के बाद बुधवार की रात चव्हाण अचानक दिल्ली पहुंच गए और वहां उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की।

कहा जा रहा है कि चव्हाण डीसीएम शिंदे से अपनी खटास का कारण बताने के लिए अमित शाह से मिलने गए थे। वहां उन्होंने शाह को ये भी बताया कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव में शिंदे को बीजेपी और खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रभाव के कारण सफलता मिली है।

अमित शाह से मिलने पहुंचे रवींद्र चव्हाण

बुधवार की देर रात महाराष्ट्र बीजेपी के अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण की दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से की गई अचानक मुलाकात के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में अटकलों का बाजार गर्म हो गया। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में चव्हाण ने शाह को राज्य की वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी, जिसमें सहयोगी दलों, विशेषकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट के बीच तालमेल और आगामी निकाय चुनावों को लेकर उत्पन्न हो सकने वाली समस्याओं की जानकारी दी गई।

रवींद्र चव्हाण ने अमिति शाह को मुंबई महानगरपालिका (BMC) सहित विभिन्न स्थानीय निकायों में एकनाथ शिंदे की मौजूदा ताकत और उनके संभावित दावों से संबंधित सीटों का विस्तृत ब्यौरा दिया। उन्होंने यह भी बताया कि कल्याण और ग्रेटर मुंबई जैसे क्षेत्रों में शिंदे और अजित के प्रभाव वाली कितनी सीटें ऐसी हैं, जहां बीजेपी भी जीतने का माद्दा रखती है।

चव्हाण ने शाह को स्पष्ट रूप से समझाने का प्रयास किया कि ठाणे और ग्रेटर मुंबई के कई इलाकों में भाजपा की ताकत लगातार बढ़ी है, इसलिए इन सीटों पर भाजपा को भी अपना दावा मजबूती से पेश करना चाहिए।

निकाय चुनाव के बाद बदलेंगे समीकरण!

सूत्रों का दावा है कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव में मुंबई में पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे (यूबीटी) को मिली सफलता को देखते हुए फिलहाल शाह ने मुंबई मनपा चुनाव के लिए शिंदे से संबंध संवारने का निर्देश चव्हाण को दिया है। लेकिन इसके साथ-साथ उन्होंने राज्य के सहयोगियों से बीजेपी की ताकत के अनुरूप निकाय चुनावों के संदर्भ में तोल-मोल करने की खुली छूट भी दे दी है। इसका व्यापक परिणाम निकाय चुनाव के बाद देखने को मिल सकता है।

ऐसा भी कहा जा रहा है कि निकाय चुनाव के परिणामों के आधार में राज्य में सहयोगियों के साथ संतुलन के लिए बीजेपी नया फॉर्मूला ला सकती है। यदि निकाय चुनावों में शिंदे की शिवसेना का प्रदर्शन गिरता है तो भाजपा अपने विस्तार का कार्य करेगी। इससे सरकार में भी नए समीकरण देखने को मिल सकते हैं।"

शिंदे के साथ किया मंथन

इन अटकलों के बीच निर्देशों के अनुरूप चव्हाण ने गुरुवार की रात रात डीसीएम शिंदे से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने खासकर मुंबई मनपा चुनाव को लेकर मंथन किया। बैठक में मुंबई बीएमसी चुनाव के अलावा ठाणे और नई मुंबई में गठबंधन और सीट बंटवारे पर भी दोनों नेताओं के बीच चर्चा हुई।

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