लातूर. महाराष्ट्र सरकार की मनुस्मृति के कुछ श्लोकों को स्कूल पाठ्यक्रम में शामिल करने की कथित योजना के खिलाफ राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा-शरद पवार) के कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को लातूर में प्रदर्शन किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने मनुस्मृति की प्रतियां जलाईं।
कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के स्कूल पाठ्यक्रम में मनुस्मृति के कुछ अंश जोड़ने की मंजूरी दी है, और इसके विरोध में उन्होंने प्रदर्शन किया। राकांपा-शरद पवार के कार्यकर्ता गांधी चौक पर एकत्र हुए और उन्होंने मनुस्मृति की प्रतियां जलाईं।
मनुस्मृति एक प्राचीन ग्रंथ है जिसका कुछ वर्ग यह कहते हुए विरोध करते हैं कि ये भेदभावपूर्ण जाति एवं वर्ण व्यवस्था को बढ़ावा देता है। अधिकार कार्यकर्ता उमाकांत धावरे ने कहा कि राज्य सरकार का यह कदम जाति विभेद, अंधविश्वास और सामाजिक मतभेद बढ़ाने वाला है।
इससे पहले शरद पवार गुट के विधायक जीतेन्द्र आव्हाड ने मनुस्मृति के कुछ श्लोकों को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने योजना के खिलाफ रायगड़ जिले के महाड में एक विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया था। उन्होंने पहले कहा था कि प्राचीन ग्रंथ जाति व्यवस्था का समर्थन करता है और महिलाओं का अपमान करता है। साथ ही अव्हाड ने लोगों से सरकार के इस फैसले का विरोध करने की अपील की थी।
उक्त विरोध प्रदर्शन का वीडियो सोशल मीडिया मंचों पर प्रसारित होने के बाद विवाद खड़ा हो गया था जिसमें आव्हाड पोस्टरों को फाड़ते हुए दिखाई दे रहे थे जिन पर आंबेडकर की तस्वीर भी थी। इस पर भाजपा ने आव्हाड की कृत्य की निंदा की और राज्य के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शन किया। वहीं, भाजपा के एक पदाधिकारी की शिकायत पर पुणे के बंडगार्डन पुलिस थाने में आव्हाड के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
बता दें कि जितेंद्र आव्हाड ने अपने कृत्य के लिए बुधवार को ही माफी मांगी थी। लेकिन इस पर राजनीति गरमाई थी।
बढ़ते विवाद के बीच अजित पवार गुट के छगन भुजबल, शरद पवार गुट के जयंत पाटिल, शिवसेना (यूबीटी) की सुषमा अंधारे समेत कई नेता अव्हाड के समर्थन में आए। (एजेंसी इनपुट के साथ)