Farmers Crisis Shivar Helpline 6772 Calls: महाराष्ट्र में प्राकृतिक आपदाओं, बढ़ते कर्ज और फसल नुकसान के कारण बेबस हुए किसानों में बढ़ती हताशा अब हेल्पलाइन के आंकड़ों में साफ झलकने लगी है।
सितंबर महीने में रिकॉर्ड 6,772 किसानों ने 'शिवार' हेल्पलाइन पर संपर्क कर अपनी पीड़ा साझा की, जो पिछले वर्ष की तुलना में 20.47% अधिक है।
शिवार फाउंडेशन के डॉ. विनायक हेगाणा के अनुसार, किसानों की परेशानियों को लेकर हेल्पलाइन पर लगातार संपर्क बढ़ रहा है। जून में 2,564 किसानों ने अपनी समस्याएं साझा करने के लिए कॉल किया था।
इसके बाद जुलाई में 1,564 और अगस्त में 2,789 किसानों ने हेल्पलाइन से मदद मांगी। सितंबर में यह संख्या बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। लगातार बदलते मौसम ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
अतिवृष्टि और बाढ़ से फसलों को नुकसान पहुंचने के बाद अब कई क्षेत्रों में सूखे की आशंका बनी हुई है। ऐसे हालात में कर्ज, उत्पादन लागत और आय में कमी का दबाव किसानों पर बढ़ रहा है। इससे उनमें आर्थिक संकट के साथ मानसिक तनाव भी गहरा रहा है।
हिंगोली में पिता की आत्महत्या के बाद 16 वर्षीय बेटा पढ़ाई जारी रखने के लिए संघर्ष कर रहा है। लातूर जिले में टीबी पीड़ित किसान पत्नी के पास दवा के पैसे नहीं हैं। वहीं धाराशिव की चयनित शिक्षिका पुणे में तंगी के कारण चावल खाकर दिन बिता रही है।
महाराष्ट्र राज्य मुआवजे की कमी, बढ़ते कर्ज और किस्तों के दबाव के साथ पारिवारिक खर्चों ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। फसल नुकसान के बाद आय प्रभावित होने से कई किसान आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।
ऐसे हालात में कर्ज चुकाने, परिवार का खर्च चलाने और बच्चों की पढ़ाई जैसी जिम्मेदारियां भी उनके लिए चुनौती बन रही हैं। लगातार बढ़ते आर्थिक दबाव का असर किसानों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, संकट में फंसे किसानों को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि मानसिक संबल और भरोसेमंद मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया जाना जरूरी है। समय पर मुआवजा, कर्ज संबंधी राहत और सरकारी योजनाओं की जानकारी किसानों को इस मुश्किल दौर से बाहर निकलने में मदद कर सकती है।