Foreign Money Transfer Scam Case: लातूर जिले के उदगीर में फर्जी यानी शेल कंपनियों के जरिए सैकड़ों करोड़ रुपये विदेश भेजने के कथित मामले में पुलिस ने चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) श्याम कालानी को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के मुताबिक, कालानी ने 16 ऐसी कंपनियों के लिए वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेज तैयार किए, जिनका वास्तविक कारोबारी अस्तित्व नहीं था।
आरोप है कि इन कंपनियों के माध्यम से 1 अप्रैल 2022 से 31 मार्च 2026 के बीच बड़ी रकम विदेश भेजी गई। इस मामले का खुलासा आयकर विभाग के सर्वेक्षण में सामने आए तथ्यों के बाद हुआ। इसके आधार पर 21 अगस्त को प्राथमिकी दर्ज की गई।
उदगीर शहर के पुलिस निरीक्षक भुसनूर ने बताया कि आरोपी को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे नौ दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच लातूर पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को सौंप दी गई है।
पुलिस के अनुसार, इस पूरे मामले में सबसे अहम कड़ी फॉर्म 15CB है। यह प्रमाणपत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा जारी किया जाता है और विदेश भेजी जाने वाली रकम पर कर संबंधी अनुपालन की पुष्टि करता है।
आरोप है कि श्याम कालानी ने जरूरी दस्तावेजों की पर्याप्त जांच किए बिना ही करीब 1,810 फॉर्म 15CB जारी कर दिए। पुलिस को संदेह है कि इन्हीं प्रमाणपत्रों के आधार पर 16 कथित शेल कंपनियों के जरिए सैकड़ों करोड़ रुपये विदेश भेजे गए।
शेल कंपनियां ऐसी संस्थाएं होती हैं, जो कागजों पर तो मौजूद रहती हैं, लेकिन उनका वास्तविक कार्यालय, कर्मचारी या कारोबार नहीं होता। ऐसी कंपनियों का इस्तेमाल कई बार धन के वास्तविक स्रोत को छिपाने, कर चोरी या अवैध वित्तीय लेन-देन को अंजाम देने के लिए किया जा सकता है।
हालांकि, इस मामले में रकम के वास्तविक स्रोत, विदेश भेजे गए धन के लाभार्थियों और कथित कंपनियों की पूरी भूमिका का खुलासा पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगा।
लातूर पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 234, 229 और 3(5) के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि 16 कथित शेल कंपनियां किसके नाम पर बनाई गई थीं, उनका संचालन कौन कर रहा था और उनके बैंक खातों से कितनी रकम का लेन-देन हुआ।
इसके अलावा विदेश भेजी गई रकम किन देशों में गई और उसके अंतिम लाभार्थी कौन हैं, इसकी भी जांच की जाएगी। आयकर विभाग के सर्वेक्षण से मिले दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड इस जांच में अहम सबूत माने जा रहे हैं।
पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश करेगी कि फॉर्म 15CB जारी करते समय आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध थे या नहीं और अगर नहीं थे तो इतने बड़े पैमाने पर प्रमाणपत्र कैसे जारी किए गए। फिलहाल CA की गिरफ्तारी के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है और EOW की जांच से इस कथित वित्तीय नेटवर्क की परतें खुलने की उम्मीद है।