शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे (प्रतीकात्मक तस्वीर, सोर्स: सोशल मीडिया) 
कोल्हापुर

शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे में बड़ा बदलाव! कोल्हापुर के 78 गांवों के लिए नई अधिसूचना जारी, जानें क्या है नया प्लान?

Shaktipeeth Expressway: महाराष्ट्र सरकार ने शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे के लिए संशोधित अधिसूचना जारी की है। कोल्हापुर के 8 तालुकों के 78 गांव अब इस 856 किमी लंबे प्रोजेक्ट के दायरे में आएंगे।

आकाश मसने

Shaktipeeth Expressway New Route: महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार ने गुरुवार को प्रस्तावित शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे के संबंध में एक संशोधित अधिसूचना जारी की है। यह एक्सप्रेसवे वर्धा और सिंधुदुर्ग जिले के पात्रदेवी के बीच बनाया जाना है। इस संशोधित योजना के तहत, कोल्हापुर जिले की 8 तालुकों के 78 गांवों को इस राजमार्ग परियोजना के दायरे में शामिल किया गया है। इनमें करवीर, पन्हाला, हातकणंगले, राधानगरी, कागल, भुदरगड, आजरा और चंदगड तालुकों में स्थित गांव शामिल हैं।

महाराष्ट्र के 13 जिलों से होकर गुजरेगा शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे

महाराष्ट्र सरकार के राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना के अनुसार, एक्सप्रेसवे के लिए नए अलाइनमेंट को अंतिम रूप दे दिया गया है। राजपत्र में प्रकाशित विवरणों के मुताबिक, यह प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे लगभग 856 किलोमीटर लंबा होगा और महाराष्ट्र के 13 जिलों को आपस में जोड़ेगा। इस एक्सप्रेसवे का निर्माण नागपुर और गोवा के बीच सीधा संपर्क स्थापित करने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

कोल्हापुर के 78 गांवों से जाएगा शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे

कोल्हापुर जिले में शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे का रास्ता करवीर, कोल्हापुर, राधानगरी, गगनबावड़ा, कागल, भुदरगड, आजरा और चंदगड तहसीलों में स्थित 78 गांवों से होकर गुजरेगा। इस बीच, इस संशोधित अधिसूचना के जारी होने से किसानों और पर्यावरण प्रेमियों के बीच एक बार फिर चिंता का माहौल पैदा हो गया है।

किन जिलों से होकर गुजरेगा शक्तिपीठ महामार्ग?

शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे पहले 12 जिलों से होकर गुजरने वाला था। लेकिन महाराष्ट्र सरकार ने अप्रैल 2026 में इस महामार्ग में कुछ बदलाव किए हैं। इस महामार्ग के पहली बार सातारा जिले को भी जोड़ा गया है। संशोधित रूट के अनुसार, शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे अब 13 जिलों से होकर गुजरेगा।

  • नागपुर/वर्धा: यहां से यात्रा शुरू होगी।
  • यवतमाल, हिंगोली और नांदेड़: विदर्भ और मराठवाड़ा के प्रमुख क्षेत्र।
  • परभणी, बीड, लातूर और धाराशिव: मराठवाड़ा का हृदय।
  • सोलापुर और सांगली: पश्चिम महाराष्ट्र के औद्योगिक और कृषि केंद्र।
  • सतारा: हाल ही में संशोधित रूट में माण और खटाव तालुकों को शामिल किया गया है।
  • कोल्हापुर: दक्षिण महाराष्ट्र का प्रमुख केंद्र।
  • सिंधुदुर्ग: कोंकण का प्रवेश द्वार, जहां गोवा सीमा के पास यह समाप्त होगा।

शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे का क्यों हो रहा विरोध?

सरकार की इस संशोधित अधिसूचना ने एक बार फिर विवादों को हवा दे दी है। कोल्हापुर और आसपास के इलाकों के किसान और पर्यावरण प्रेमी इस प्रोजेक्ट का कड़ा विरोध कर रहे हैं। यह आशंका जताई जा रही है कि एक्सप्रेसवे के निर्माण से उपजाऊ कृषि भूमि, वन क्षेत्रों, साथ ही कुछ ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण और पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसके चलते शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट को इस क्षेत्र के कई हिस्सों में तीव्र विरोध का सामना करना पड़ रहा है। राजपत्र में दी गई जानकारी के अनुसार, पिछली अधिसूचना में सूचीबद्ध कुछ गांवों की सीमाओं और मार्ग अलाइनमेंट में संशोधन किए गए हैं और इन परिवर्तनों को दर्शाने वाली एक संशोधित सूची अब प्रकाशित की गई है।

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