गोकुल डेयरी में पांच सरकारी निदेशक नियुक्त करने के फैसले पर सियासी विवाद गहरा गया है।
सतेज पाटिल ने आरोप लगाया कि सरकार जनादेश को पलटने की कोशिश कर रही है।
प्रकाश आबिटकर ने कहा कि संस्था को प्रशासक से बचाने के लिए यह रास्ता निकाला है।
Gokul Dairy Kolhapur Satej Patil Vs Prakash Abitkar: कोल्हापुर की गोकुल सहकारी दुग्ध उत्पादक संस्था में पांच सरकारी नामित निदेशकों की नियुक्ति के फैसले पर कांग्रेस विधायक सतेज पाटिल ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर अध्यादेश जारी करने की प्रक्रिया में देरी कर रही है, ताकि उन्हें अदालत जाने का अवसर न मिल सके।
पाटिल ने कहा कि मुझे पता है कि हस्ताक्षर क्यों नहीं किए गए। मैं भी सरकार में काम कर चुका हूं। वहां क्या चल रहा है, यह अच्छी तरह समझता हूं। मुंबई में आयोजित पत्रकार परिषद में पाटिल ने कहा कि मंत्रिमंडल का फैसला जनता के मतदान के अधिकार को कमजोर करने वाला है। सरकार गोकुल को केंद्र में रखकर निर्वाचित निदेशकों के बीच अपने नामित सदस्यों को शामिल करने का कानून ला रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कोल्हापुर की जनता ने चुनाव में उनके पैनल को 25 में से 13 सीटें देकर बहुमत दिया था, लेकिन सरकार नियमों में बदलाव कर इस जनादेश को पलटने और बहुमत अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है।
पाटिल ने दावा किया कि सरकार का यह अध्यादेश गोकुल सहित केवल तीन सहकारी संस्थाओं पर लागू होगा। इसमें चीनी मिलों और जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों को बाहर रखा गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सहकारिता क्षेत्र के लिए कानून बनाया जा रहा है तो उसका दायरा सभी संस्थाओं पर समान रूप से क्यों नहीं रखा गया? उन्होंने मंत्रिमंडल के फैसले को लोकतांत्रिक जनादेश के खिलाफ बताते हुए इसे काला दिन करार दिया।
कांग्रेस विधायक ने कहा कि यदि सरकार को अपने फैसले और कानून पर इतना ही भरोसा था तो मंत्रिमंडल की मंजूरी के तुरंत बाद अध्यादेश जारी क्यों नहीं किया गया? उनके अनुसार, राज्यपाल दोपहर में उपलब्ध थे, इसके बावजूद उसी दिन अध्यादेश पर हस्ताक्षर नहीं करवाए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अगले दिन तक पूरी प्रक्रिया पूरी करना चाहती है, ताकि विपक्ष को अदालत में चुनौती देने का अवसर न मिले।
पाटिल ने कहा कि अध्यादेश जारी होने के बाद दुग्ध विभाग को चार नामित सदस्यों के नाम तय कर शासनादेश भी जारी करना होगा। सरकार इस पूरी प्रक्रिया को अगले दिन तक आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि मुझे पता है कि सरकार में क्या चल रहा है। मैं भी सरकार में काम कर चुका हूं। ऐसा नहीं है कि मुझे कुछ समझ नहीं आता।'' उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का फैसला आने के बाद भी उसका विरोध जारी रहेगा।
सतेज पाटिल ने इस पूरे फैसले के पीछे मंत्री हसन मुश्रीफ और चंद्रकांत पाटिल की प्रमुख भूमिका होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नियमों में बदलाव कर निदेशक मंडल में नामित सदस्यों को शामिल करने की पहल इन दोनों नेताओं ने की है। पाटिल ने यह भी दावा किया कि मंत्रिमंडल की बैठक में इस कानून के संभावित परिणामों पर किसी ने चर्चा नहीं की।
उन्होंने कानून को पूर्वलक्षी प्रभाव से लागू करने पर भी सवाल उठाया। पाटिल ने कहा कि किसी कानून में पूर्वलक्षी प्रभाव का प्रावधान करते समय उसके परिणामों पर गंभीरता से विचार करना जरूरी है। कांग्रेस विधायक ने बताया कि राहुल गांधी ने भी उनसे गोकुल डेयरी के पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली है।
गोकुल के अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर जारी विवाद में राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने सरकार के फैसले का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि गोकुल पर प्रशासक नियुक्त करने या दोबारा चुनाव कराने की नौबत से बचाने के लिए सरकार ने पांच नामित निदेशकों की नियुक्ति का रास्ता निकाला है। इसमें कोई चालबाजी नहीं है। उन्होंने कांग्रेस विधायक सतेज पाटिल के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि यदि विपक्ष के पास 13 निदेशकों का बहुमत है तो वे खुद बैठक बुलाकर अपना अध्यक्ष चुनकर दिखाएं।
आबिटकर ने कहा कि गोकुल के चुनाव में महाविकास आघाड़ी समर्थित पैनल के 13 और महायुति समर्थित पैनल के 12 निदेशक निर्वाचित हुए हैं। संस्था के उपनियमों के अनुसार अध्यक्ष के चुनाव के लिए कम से कम 14 निदेशकों की उपस्थिति अनिवार्य है। ऐसे में विपक्ष के 13 और सत्तापक्ष के 12 निदेशक होने के कारण कोई भी पक्ष अकेले कोरम पूरा नहीं कर सकता।