Pankaja Munde High Court Notice Jalna (फोटो क्रेडिट-X) 
जालना

मंत्री पंकजा मुंडे को हाई कोर्ट का नोटिस: जालना जिला योजना समिति की वैधता पर उठे सवाल, क्या अवैध है फंड आवंटन?

Pankaja Munde High Court Notice Jalna: बॉम्बे हाई कोर्ट ने जालना जिला योजना समिति के अवैध गठन को लेकर मंत्री पंकजा मुंडे को नोटिस जारी किया है। फंड आवंटन पर भी उठे गंभीर सवाल।

अनिल सिंह

Pankaja Munde High Court: महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और जालना जिले की पालक मंत्री पंकजा मुंडे को बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद बेंच से एक महत्वपूर्ण कानूनी नोटिस मिलने के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। यह मामला जालना जिला योजना समिति (DPC) के गठन की वैधता से जुड़ा है, जिसे राज्य सरकार द्वारा स्थापित किया गया था। अदालत ने इस समिति की संरचना और इसके द्वारा किए जा रहे धन के आवंटन पर सवाल उठाने वाली याचिका को गंभीरता से लेते हुए पंकजा मुंडे और संबंधित सरकारी अधिकारियों से जवाब तलब किया है।

स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता भाऊसाहेब गोरे द्वारा दायर इस रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस विभा कंकनवाड़ी और जस्टिस हितेन वेनेगावकर की खंडपीठ ने 4 मार्च 2026 को यह आदेश जारी किया। याचिकाकर्ता का आरोप है कि जिला योजना समिति का गठन कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन करके किया गया है, जिसके कारण समिति द्वारा विकास कार्यों के लिए आवंटित किए जा रहे फंड की वैधानिकता पर भी संकट खड़ा हो गया है। सरकार के लिए यह स्थिति असहज करने वाली है क्योंकि पंकजा मुंडे स्वयं इस जिले की प्रभारी मंत्री के रूप में कार्यभार संभाल रही हैं।

कानून के उल्लंघन और अवैध फंड आवंटन का आरोप

याचिकाकर्ता के वकील ने बॉम्बे हाई कोर्ट में तर्क दिया कि जालना जिला योजना समिति का वर्तमान स्वरूप कानूनी रूप से दोषपूर्ण है। याचिका में दावा किया गया है कि अवैध गठन के कारण ही समिति द्वारा लिए गए वित्तीय निर्णय और धन का आवंटन भी संदेह के घेरे में है। याचिकाकर्ता का कहना है कि विकास कार्यों के लिए निर्धारित धनराशि का उपयोग उन उद्देश्यों के लिए नहीं किया जा रहा है जिनके लिए उन्हें आवंटित किया गया था। अदालत अब इस बात की सूक्ष्मता से जांच करेगी कि क्या समिति की संरचना महाराष्ट्र जिला योजना समिति अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप है या नहीं।

याचिकाकर्ता की भूमिका और कोर्ट का रुख

दिलचस्प बात यह है कि याचिकाकर्ता भाऊसाहेब गोरे स्वयं पूर्व में इस समिति के विशेष आमंत्रित सदस्य रह चुके हैं। उन्हें 22 अगस्त 2024 के सरकारी आदेश के तहत नियुक्त किया गया था, लेकिन उनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्होंने इस संरचना को चुनौती दी है। अदालत ने प्रारंभिक सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि वह फिलहाल समिति द्वारा लिए गए पिछले निर्णयों या कार्यों पर कोई टिप्पणी नहीं करेगी। बेंच का मुख्य ध्यान इस समय केवल समिति की संरचनात्मक वैधता की जांच करने पर केंद्रित है ताकि कानून का शासन सुनिश्चित किया जा सके।

1 अप्रैल को होगी अगली महत्वपूर्ण सुनवाई

हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और मंत्री पंकजा मुंडे सहित सभी प्रतिवादियों को अपना पक्ष रखने के लिए समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 1 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है, जो जालना जिले की विकास योजनाओं और महायुति सरकार की प्रशासनिक नीतियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि अदालत समिति के गठन को अवैध पाती है, तो पंकजा मुंडे के नेतृत्व वाली जिला योजना समिति द्वारा पिछले महीनों में लिए गए कई बड़े प्रोजेक्ट्स और वित्तीय आवंटन अधर में लटक सकते हैं। राजनीतिक गलियारों में इस नोटिस को पंकजा मुंडे के लिए एक बड़े प्रशासनिक झटके के रूप में देखा जा रहा है।

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