Prasad Lad Manoj Jarange Conversation: महाराष्ट्र की राजनीति और मराठा आरक्षण के आंदोलन में एक बेहद नाटकीय और बड़ा मोड़ सामने आया है। जालना जिले के अंतरवाली सराटी में पिछले पांच दिनों से आमरण अनशन पर बैठे मराठा प्रदर्शनकारी मनोज जरांगे पाटिल के आंदोलन को लेकर राज्य सरकार ने बड़ी पहल की है।
सरकार के दूत के रूप में पहुंचे भाजपा विधायक प्रसाद लाड ने जरांगे पाटिल से मुलाकात कर कई महत्वपूर्ण आश्वासन दिए हैं। लाड ने वचन दिया है कि 17 सितंबर यानी मराठवाडा मुक्तिसंग्राम दिवस से पहले मराठा समाज की सभी समस्याओं और मांगों का स्थायी समाधान कर दिया जाएगा और उन्हें ओबीसी समाज की तरह ही सभी आर्थिक व शैक्षणिक सुविधाएं दी जाएंगी।
इस मुलाकात के दौरान विधायक प्रसाद लाड ने घोषणा की कि 3 सितंबर दोपहर 12 बजे से हैदराबाद गजट के आधार पर कुणबी प्रमाणपत्र बांटने की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
इस घोषणा पर खुशी जाहिर करते हुए मनोज जरांगे ने कहा कि अगर वास्तव में कल हैदराबाद गजट के अनुसार कुणबी प्रमाणपत्रों का वितरण शुरू होता है, तो वे सरकार पर फूल बरसाएंगे। उन्होंने मांग की कि सरकार को सतारा और कोल्हापुर गजट के अनुसार भी तत्काल जीआर जारी करना चाहिए और तीन महीने बाद उसकी भी अंमलबजावणी करनी चाहिए।
प्रसाद लाड के काफी समझाने और उनके शब्दों का मान रखते हुए मनोज जरांगे पाटील ने पानी पिया और सलाइन भी लगवाई, लेकिन वे अपना अनशन पूरी तरह समाप्त करने के लिए तैयार नहीं हुए। जरांगे ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, अनशन पूरी तरह खत्म नहीं होगा।
उन्होंने सरकार को 4 दिनों की समय दी है और शर्त रखी है कि जिन चार छात्रों के रद्द किए गए कुणबी प्रमाणपत्र वापस नहीं दिए जाते, वे उपोषण नहीं छोड़ेंगे। जरांगे ने लाड से कहा, मैं केवल आपकी जिद और शब्दों का सम्मान करते हुए उठकर बैठा हूं, वरना मैं मंत्रियों को भी नहीं गिनता।
मनोज जरांगे ने साफ शब्दों में कहा कि मराठा समाज को ओबीसी वर्ग के कोटे से 1 प्रतिशत आरक्षण भी नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि जिनकी वंशावली या ऐतिहासिक रिकॉर्ड मिल रहे हैं, उन्हें कुणबी प्रमाणपत्र मिलना ही चाहिए और ओबीसी वर्ग को भी इसका विरोध नहीं करना चाहिए।
इस दौरान उन्होंने कैबिनेट मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि विखे पाटिल कभी सच नहीं बोलते, वे कोई खेल कर रहे हैं और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे तथा मुख्यमंत्री फडणवीस के बीच झगड़ा लगाने की कोशिश कर रहे हैं।
आंदोलन को खत्म कराने के लिए प्रसाद लाड ने सरकार की ओर से बड़े वादे किए हैं।
मुकदमों की वापसी: मराठा आंदोलन के दौरान दर्ज हुए कुल 1,376 मामलों में से अधिकांश को वापस ले लिया गया है, और बचे हुए मामलों को तकनीकी व कानूनी प्रक्रिया के तहत वापस लेने पर विचार चल रहा है।
शिंदे समिति को विस्तार: कुणबी रिकॉर्ड खोजने वाली न्यायमूर्ति शिंदे समिति को एक साल का सेवा विस्तार दिया जाएगा और मुंबई में उनके काम के लिए 3,000 वर्ग फुट का कार्यालय दिया जाएगा।
आरक्षण समिति के लिए नया कार्यालय: मराठा आरक्षण समिति के कामकाज के लिए मुंबई में 1,250 वर्ग फुट की जगह दी जा रही है और अब यह समिति सीधे मंत्रालय से समन्वय करेगी।
छात्रों को बड़ी राहत: जब तक आरक्षण पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, किसी भी मराठा छात्र का प्रवेश रद्द नहीं होगा और उनकी फीस का पूरा खर्च राज्य सरकार उठाएगी।
अण्णासाहेब पाटिल महामंडल को अतिरिक्त 300 करोड़: अण्णासाहेब पाटिल आर्थिक पिछड़ा विकास महामंडल के लिए रुकी हुई 300 करोड़ रुपये की राशि तुरंत जारी की जा रही है।
यह देखना दिलचस्प होगा कि कल शुरू होने वाली प्रमाणपत्र वितरण प्रक्रिया के बाद क्या महाराष्ट्र में मराठा आंदोलन का यह पांच दिवसीय तनावपूर्ण दौर पूरी तरह समाप्त हो पाता है या नहीं।