

Tukaram Mundhe Anti Food Adulteration Campaign: क्या सरकारी विभागों में काम न होने के पीछे हमेशा संसाधनों या कर्मचारियों की कमी का रोना रोया जाना सही है? या फिर असली कमी दृढ़ इच्छाशक्ति की होती है? महाराष्ट्र के बेहद चर्चित और कड़क आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे ने अपनी हालिया कार्रवाई से इस पुरानी बहस को हमेशा के लिए खत्म कर दिया है।
महाराष्ट्र में खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों के खिलाफ उनके द्वारा शुरू की गई ताबड़तोड़ कार्रवाई ने न केवल मिलावटखोरों की नींद उड़ा दी है, बल्कि अब देश की सबसे बड़ी खाद्य नियामक संस्था FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण) के प्रमुख ने भी सार्वजनिक तौर पर उनके काम का लोहा माना है।
FSSAI के CEO रजित पुन्हानी ने आईएएस तुकाराम मुंढे के काम की खुलकर और सार्वजनिक रूप से सराहना की है। उन्होंने मुंढे की इस मुहिम का समर्थन करते हुए कहा, अगर काम करने की सच्ची इच्छाशक्ति हो, तो उपलब्ध संसाधनों में ही रास्ता निकल आता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि मुंढे की धड़क कार्रवाई इस बात का जीता-जागता सबूत है कि 'इच्छा होगी तो मार्ग मिल ही जाएगा'।
FSSAI प्रमुख रजित पुन्हानी ने प्रशासनिक गलियारों के एक बड़े और कड़वे सच से पर्दा उठाया। उन्होंने बताया कि सिविल सेवा अधिकारियों के बीच खाद्य सुरक्षा विभाग में पोस्टिंग को अक्सर एक पनिशमेंट पोस्टिंग के रूप में देखा जाता था।
पुन्हानी के अनुसार, कई आईएएस अधिकारी खाद्य सुरक्षा आयुक्त के रूप में काम करने से कतराते थे, क्योंकि इस विभाग और इसके काम को पहले कभी गंभीरता से नहीं लिया गया। अधिकारियों का झुकाव हमेशा सीधे स्वास्थ्य विभाग की ओर होता था, क्योंकि वहां डॉक्टरों, अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का लगभग 100 साल पुराना, बेहद मजबूत और स्थापित नेटवर्क उपलब्ध रहता है। ऐसे में इस महत्वपूर्ण विभाग को लगभग दरकिनार कर दिया गया था।
तुकाराम मुंढे की इस मुहिम की सबसे खास बात का जिक्र करते हुए रजित पुन्हानी ने बताया कि मुंढे ने मिलावटखोरी करने वाले खाद्य व्यवसायों, होटलों, रेस्टोरेंट्स और बड़े गोदामों के खिलाफ जो बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू की है, उसके लिए उन्हें कोई अतिरिक्त स्टाफ नहीं दिया गया था।
पुन्हानी ने कहा, मुंढे ने यह पूरी कार्रवाई उसी पुरानी टीम के साथ मिलकर की है, जो पहले से विभाग में मौजूद थी। इसके लिए कोई नए खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की भर्ती नहीं की गई थी। इसका साफ मतलब यह है कि अगर दिल में काम करने का जज्बा हो, तो उपलब्ध मानव संसाधन के साथ भी बेहतरीन परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। मुंढे की इस कार्रवाई ने आम जनता के बीच खाद्य सुरक्षा विभाग और खाद्य सुरक्षा आयुक्त के पद की अहमियत को लेकर एक बड़ी जागरूकता पैदा कर दी है।
FSSAI प्रमुख ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि अब देश के हर राज्य में एक समर्पित खाद्य सुरक्षा आयुक्त होना बेहद जरूरी हो गया है। तुकाराम मुंढे की इस बेमिसाल कार्रवाई के बाद अब यह मांग और भी मजबूत हो गई है कि देश के नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए इस विभाग को पूरी तरह सक्रिय और स्वायत्त रखा जाए।