Jalna Rural Education Administration Maharashtra ( सोर्स: सोशल मीडिया ) 
जालना

जालना में शिक्षा व्यवस्था पर संकट, पदोन्नति अटकी, ग्रामीण स्कूलों की निगरानी व्यवस्था कमजोर

Jalna Zilla Parishad Education Crisis: जालना जिले में केंद्र प्रमुख के 106 में से 96 पद खाली होने से शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है। पदोन्नति प्रक्रिया वर्षों से लंबित होने पर सवाल उठ रहे हैं।

अंकिता पटेल

Jalna Rural Education Administration Maharashtra: जालना जिला परिषद शिक्षा विभाग की लापरवाही के चलते जिले में केंद्रप्रमुख, विस्तार अधिकारी प्रधानाध्यापकों के सैकड़ों पद रिक्त पड़े हैं। स्थिति इतनी भयावह है कि केंद्र प्रमुखों के 106 स्वीकृत पदों में से 96 पद रिक्त हैं व मात्र 10 केंद्रप्रमुख जिले का बोझ वहन कर रहे हैं।

गत 10 से 12 वर्षों से पदोन्नति प्रक्रिया लंबित रहने से ग्रामीण अंचल की शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ पूरी तरह टूट चुका है। अंबड़ में 16 स्वीकृत पदों में से केवल 1 पद पर कार्यरत है व 15 पद रिक्त हैं। घनसावंगी में 12 में से मात्र 1 पद सक्रिय है ब11 पद खाली हैं।

भोकरदन में 17 में से सिर्फ 2 पद कार्यरत हैं, जालना में 17 में से 4 पद भरे हैं व परतूर में, तो 10 में से मात्र 1 पद पर ही काम हो रहा है। आंकड़ों से स्पष्ट है कि कई तहसीलों में केंद्र प्रमुख का पद केवल कागजों पर ही जीवित है।

कई स्थानों पर केंद्र प्रमुख के पद पर प्रभारी राज चलाकर पसंदीदा अध्यापकों को प्रभारी का प्रभार सौंपा जा रहा है। इससे न तो अपनी मूल शाला को पूरा न्याय दे पा रहे हैं और न ही केंद्र का प्रशासनिक कार्य सुचारू रूप से संभाल पा रहे हैं।

केंद्र प्रमुख विद्यालय व प्रशासन के बीच की वह महत्वपूर्ण कड़ी होता है जो विद्यालय निरीक्षण, शिक्षकों को मार्गदर्शन व शिक्षा गुणवत्ता नियंत्रण का कार्य करता है। इस कड़ी के टूटने से ग्रामीण क्षेत्र के गरीब बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

अतिरिक्त शिक्षकों का भविष्य भी अधर में जिले में कई शिक्षक अतिरिक्त घोषित हो चुके है। सरकार के निर्णय के अनुसार उनका अन्य जिलों में समायोजन करने की संभावना है।

यदि प्रशासन तत्काल केंद्रप्रमुख व प्रधानाध्यापकों के रिक्त पदों पर पदोन्नति प्रक्रिया चलाए, तो इन अतिरिक्त शिक्षकों को जिले में ही समाहित किया जा सकता है। शिक्षक संगठनों के समय-समय पर ज्ञापन सौंपकर धरना-प्रदर्शन व अनशन करने के बावजूद हर बार प्रशासन ने महज देकर मामला टाल दिया।

संगठन के प्रतिनिधियों ने चेताया कि जब अन्य जिलों में नियमित पदोन्नति होती है, तो जिले में ही यह उदासीनता क्यों? यदि जिला प्रशासन ने शीघ्र पदोन्नति प्रक्रिया नहीं अपनाई तो तीव आंदोलन छेड़ा जाएगा।

नियम के बावजूद 12 वर्षों से उपेक्षा

ग्राम विकास विभाग के आदेशानुसार हर वर्ष जनवरी से मार्च के बीच पदोन्नत्ति प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य है। इसके बावजूद जिप प्रशासन ने नियम की सुविधाजनक अनदेखी की है। रिकॉर्ड के अनुसार, अंतिम बार पदोन्नति 2010 में हुई थी।

इसके बाद जून 2015 में कुछ स्नातक शिक्षकों को अनावृत केंद्र प्रमुख के रूप में नियुक्त किया गया, उसके बाद से कोई स्थायी भर्ती या पदोन्नति प्रक्रिया नहीं अपनाई गई।

जिप के नवनियुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मिन्नू पीएम के बारे में कहा जाता है कि वे अनुशासनप्रिय, कर्तव्यनिष्ठ व सुशासन की पक्षधर अधिकारी हैं।

शिक्षक संगठनों और शिक्षा प्रेमी नागरिकों को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में यह पदोन्नति प्रक्रिया शीघ्र और युद्धस्तर पर पूरी की जाएगी

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