प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया ) 
जालना

GI मान्यता के बावजूद मार्केटिंग कमजोर, जालना मोसंबी पर फोकस; सरकार से प्रचार की मांग

Jalna Farmers Association: GI मान्यता प्राप्त जालना मोसंबी को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत ब्रांड बनाने के लिए बागायतदार संघ ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से प्रभावी मार्केटिंग की मांग क

अंकिता पटेल

Jalna Mosambi GI: जालना जिले की पहचान बन चुकी और भौगोलिक संकेतक (GI) मान्यता प्राप्त जालना मोसंबी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सशक्त ब्रांड के रूप में स्थापित करने के लिए जालना जिला फल एवं मोसंबी बागायतदार संघ ने ठोस कदम उठाए हैं।

जिले के दौरे पर आए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात कर संघ ने एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा और जालना मोसंबी को उसका वास्तविक ब्रांड मूल्य दिलाने हेतु सरकारी स्तर पर प्रभावी मार्केटिंग व प्रचार अभियानों की मांग की।

ज्ञापन में संघ के अध्यक्ष पांडुरंग डोंगरे और सचिव अतुल लड्ढा ने मोसंबी उत्पादन के महत्व और बागायतदारों की अपेक्षाओं को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि जालना जिले में वर्तमान में लगभग 40 हजार एकड़ क्षेत्र में मोसंबी की रिकॉर्ड पैदावार होती है।

काली-मुरमाड़ मिट्टी जलवायु के है अनुकूल

क्षेत्र की विशिष्ट काली-मुरमाड़ मिट्टी और अनुकूल जलवायु के कारण जालना की मोसंबी स्वाद, सुगंध तथा मैग्नीशियम और टीएसएस जैसे पोषक तत्वों की दृष्टि से अन्य क्षेत्रों की तुलना में श्रेष्ठ मानी जाती है।

इन्हीं विशेषताओं के चलते करीब एक दशक पहले जालना मोसंबी को GI मान्यता प्राप्त हुई थी। संघ ने यह भी रेखांकित किया कि इतनी उच्च गुणवत्ता और समृद्ध विरासत के बावजूद जालना मोसंबी को अभी तक अपेक्षित राष्ट्रीय पहचान नहीं मिल सकी है।

GI मान्यता केवल एक प्रमाणपत्र नहीं, बल्कि स्थानीय मिट्टी और किसानों की मेहनत की कानूनी पहचान है, इसलिए इसका प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ किसानों तक पहुंचना आवश्यक है।

मार्केटिंग को सशक्त बनाने के लिए संघ ने कई नवाचारी सुझाव दिए। इनमे समृद्धि महामार्ग, राष्ट्रीय राजमागों और प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर "GI पंजीकृत जालना मोसंबी का जिला जैसे संदेश वाले बड़े साइनबोर्ड लगाने की मांग प्रमुख है।

इसके साथ ही छत्रपति संभाजीनगर एयरपोर्ट तथा जिले के सभी सरकारी कार्यालयों में मोसंबी से जुड़ी जानकारी देने वाले डिजिटल डिस्प्ले और क्यूआर कोड युक्त पोस्टर लगाने का प्रस्ताव रखा गया, ताकि उपभोक्ताओं को सीधे बागायतदारों की जानकारी मिल सके।

किसानों को मिलेगा फायदा

संघ ने कृषि विभाग से आग्रह किया कि वह अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर जालना मोसंबी के प्रचारात्मक वीडियो जारी करें और राज्य व राष्ट्रीय स्तर की कृषि प्रदर्शनियों में इसके लिए अलग सरकारी पवेलियन उपलब्ध कराए।

GI टैग के महत्व पर जोर देते हुए बताया गया कि इससे नकली उत्पादों से किसानों की सुरक्षा होती है और उपभोक्ताओं को प्रामाणिक उत्पाद की गारंटी मिलती है।

प्रभावी ब्रांडिंग के अभाव में अन्य राज्यों द्वारा जालना के नाम के दुरुपयोग की आशंका बनी रहती है, जिसका सीधा नुकसान स्थानीय किसानों को होता है। संघ का कहना है कि GI टैग के साथ बेहतर पैकेजिंग और निर्यात प्रोत्साहन मिलने पर किसानों को प्रीमियम मूल्य मिलेगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।

साथ ही विद्यालय स्तर पर "नो योर डिस्ट्रिक्ट क्रॉप जैसे अभियानों के माध्यम से नई पीढ़ी में स्थानीय फसलों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का सुझाव भी दिया गया ज्ञापन में उम्मीद जताई गई कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इन सभी प्रस्तावों पर सकारात्मक निर्णय लेते हुए जिला प्रशासन और कृषि विभाग को आवश्यक निर्देश देंगे, ताकि जालना मोसंबी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी पहचान और सम्मान मिल सके।

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