सांकेतिक फोटो (सोर्स: सोशल मीडिया) 
जालना

निजाम काल का सपना अब होगा पूरा: जालना-खामगांव रेल परियोजना को केंद्र की हरी झंडी, जानें पूरा इतिहास

Jalna New Railway Junction: जालना-खामगांव रेल परियोजना का 115 साल का इंतजार खत्म! भूमि अधिग्रहण के आदेश जारी, ₹2453 करोड़ की मंजूरी। जानें मराठवाड़ा-विदर्भ के विकास से जुड़ी इस बड़ी खबर का पूरा इतिहास।

गोरक्ष पोफली

Jalna Khamgaon Railway Project: जालना और खामगांव को जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित रेल परियोजना का 115 वर्ष पुराना सपना अब साकार होने की दिशा में बढ़ गया है। केंद्र सरकार ने इस परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण संबंधी आदेश जारी कर दिए हैं, जिससे मराठवाड़ा और विदर्भ क्षेत्र के विकास को एक नई गति मिलेगी। यह रेल मार्ग न केवल यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाएगा, बल्कि उत्तर भारत से सीधा संपर्क स्थापित कर क्षेत्र के व्यापार, उद्योग और कृषि क्षेत्र के लिए गेम-चेंजर साबित होगा।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और संघर्ष

इस रेल परियोजना का इतिहास ब्रिटिश और निजाम शासन काल से जुड़ा है। आधिकारिक तौर पर 30 जून 1906 को ब्रिटिश और निजाम सरकार ने इसे मंजूरी दी थी और उस समय इसके लिए 32 लाख 65 हजार रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की गई थी। वर्ष 1932-34 के दौरान भूमि अधिग्रहण के साथ काम भी शुरू हुआ था, लेकिन विश्व युद्ध छिड़ जाने के कारण यह महत्वाकांक्षी योजना बीच में ही रुक गई और आजादी के बाद भी कई दशकों तक ठप पड़ी रही। इस सपने को पुनर्जीवित करने में रेलवे संघर्ष समिति की दो दशकों की लंबी लड़ाई का बड़ा योगदान है। स्व. गणेश चौधरी के नेतृत्व में समिति ने लगातार आंदोलन और जन जागरण के माध्यम से इस मांग को जीवित रखा।

प्रशासनिक और राजनीतिक प्रयास

परियोजना को गति देने में पूर्व रेल राज्यमंत्री रावसाहेब पाटील दानवे के प्रयासों से वर्ष 2011 में दोबारा सर्वेक्षण कराया गया। इसके बाद, पूर्व मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने 15 मार्च 2024 को परियोजना खर्च में 50 फीसदी भागीदारी स्वीकार करते हुए लगभग 2453.85 करोड़ रुपये मंजूर किए। चिखली विधायक श्वेता महाले और केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव की पहल पर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के साथ हुई बैठकों ने इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

भविष्य की संभावनाएं

जालना अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण देश के मध्य भाग में स्थित है। इस नई रेल लाइन के जुड़ने से यह शहर भविष्य में एक बड़े रेलवे जंक्शन के रूप में विकसित हो सकता है। रेलवे संघर्ष समिति ने इस सफलता के बाद अब जालना-बीड़ रेल संपर्क के लिए भी अपना अगला अभियान शुरू करने की घोषणा की है। यह विकास मराठवाड़ा और विदर्भ के औद्योगिक व व्यापारिक परिदृश्य को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखता है।

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