गायत्री भंगाले (सोर्स: सोशल मीडिया) 
जलगांव

जलगांव में शरद पवार को बड़ा झटका! भुसावल नगराध्यक्ष गायत्री भंगाले की कुर्सी छिनी, जाति प्रमाणपत्र निकला अवैध

Bhusawal Nagar Parishad President Disqualified: भुसावल में शरद पवार गुट को तगड़ा झटका लगा है। नगर परिषद अध्यक्ष गायत्री भंगाले का जाति प्रमाणपत्र अवैध घोषित होने के बाद उनका पद रद्द कर दिया है।

आकाश मसने

Bhusawal Municipal Council President Gayatri Bhangale Caste Certificate Controversy: महाराष्ट्र जलगांव जिले के भुसावल से बड़ी राजनीतिक खबर सामने आई है। भुसावल नगरपरिषद की नगराध्यक्ष गायत्री भंगाले को बड़ा झटका लगा है। राज्य सरकार ने उनको नगरसेवक और नगराध्यक्ष पद से बर्खास्त कर दिया है। यह कार्रवाई उनके जाति प्रमाणपत्र को अवैध ठहराए जाने के बाद की गई है। इसके साथ ही भुसावल नगराध्यक्ष पद अब आधिकारिक रूप से रिक्त घोषित कर दिया गया है।

गायत्री भंगाले पर क्या लगा था आराेप ?

गायत्री भंगाले ने हाल ही में हुए नगरपरिषद चुनाव में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए राज्य के वस्त्रोद्योग मंत्री संजय सावकारे की पत्नी रजनी सावकारे को पराजित किया था। उनकी इस जीत को स्थानीय राजनीति में बड़ा उलटफेर माना जा रहा था। हालांकि, चुनाव के बाद भाजपा और रजनी सावकारे की ओर से आरोप लगाया गया था कि गायत्री भंगाले द्वारा नामांकन के साथ प्रस्तुत किया गया जात प्रमाणपत्र फर्जी है। इस शिकायत के बाद मामले की जांच जात प्रमाणपत्र सत्यापन समिति को सौंपी गई।

दस्तावेजों की विस्तृत पड़ताल

जांच के दौरान समिति ने सभी दस्तावेजों की विस्तृत पड़ताल की और अंततः उनका जाति प्रमाण पत्र अवैध पाया गया। इसके बाद जिला प्रशासन ने रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजी, जिस पर अंतिम निर्णय लेते हुए सरकार ने उन्हें पद के लिए अयोग्य घोषित कर दिया।

इस निर्णय में महाराष्ट्र अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग प्रमाण पत्र सत्यापन नियम, 2012 के नियम 19(2) के तहत कार्रवाई शुरू करने के निर्देश भी जारी किए गए। तदनुसार, यह निर्धारित किया गया कि भांगले द्वारा प्राप्त सभी सरकारी लाभ वापस ले लिए जाएं, और संबंधित प्रमाण पत्र सरकार को सौंप दिया जाए।

कार्रवाई पर क्या बोलीं गायत्री भंगाले?

इस कार्रवाई के बाद गायत्री भंगाले ने आरोप लगाया है कि उनके खिलाफ यह निर्णय राजनीतिक दबाव और द्वेष की भावना से लिया गया है। उन्होंने कहा कि वह इस फैसले को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में अपील करेंगी। इस फैसले के बाद भुसावल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और अब सभी की नजरें नए नगराध्यक्ष के चयन को लेकर होने वाली राजनीतिक गतिविधियों पर टिकी हैं।

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