अस्पतालों में अग्निकांड सोर्स: AI
महाराष्ट्र

6 साल में 41 मासूमों की मौत; अमरावती से झांसी तक अस्पताल बने आग का गोला, लेकिन एक भी दोषी को नहीं हुई सजा

Hospital Fire Incidents In India: सरकारी और निजी अस्पतालों के नवजात वार्डों में लगातार हो रहे अग्निकांडों ने देश की स्वास्थ्य सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी। पिछले 6 सालों के आकड़े डरा देने वाले हैं।

आकाश मसने

Hospital Fire Safety India: देश के सरकारी और निजी अस्पतालों के नवजात वार्ड (NICU/SNCU) मासूमों के जीवन की रक्षा के लिए बनाए गए हैं, लेकिन यही केंद्र अब चरमराती सुरक्षा व्यवस्था, लापरवाही और घटिया रख-रखाव की वजह से उनके लिए चितागाह साबित हो रहे हैं। बीते कुछ वर्षों के आंकड़े एक भयावह तस्वीर पेश करते हैं। अमरावती जिला महिला अस्पताल में सोमवार को हुए अग्निकांड ने 3 बच्चाें की जान ले ली। इस अग्निकांड ने दिल्ली, भोपाल, झांसी और भंडारा में हुए हादसों की याद काे ताजा कर दिया है।

पिछले 6 सालों में 41 बच्चों की मौत

पिछले पांच सालों में वर्ष 2021 से 2024 के बीच महाराष्ट्र के भंडारा, मध्य प्रदेश के भोपाल, राजधानी दिल्ली और उत्तर प्रदेश के झांसी स्थित अस्पतालों में हुए भीषण अग्निकांडों में 38 से अधिक नवजात शिशुओं की जलकर या जहरीले धुएं से दम घुटने के कारण दर्दनाक मौत हो चुकी है। अमरावती अग्निकांड को जोड़ दिया जाए तो यह आंकड़ा अब 41 तक पहुंच चुका है।

हर हादसे के तुरंत बाद प्रशासनिक अमला हरकत में आता है, उच्च स्तरीय जांच कमेटियों का गठन होता है, मुआवजे का ऐलान किया जाता है और कुछ अधिकारियों या कर्मचारियों को निलंबित कर मामले को शांत कर दिया जाता है।

अमरावती जिला महिला अस्पताल में आग से मशीनें व सामान जलकर खाक

हादसों के जिम्मेदारों को नहीं हुई सजा

हालांकि, सबसे कड़वी सच्चाई यह है कि दर्जनों मासूमों की जान जाने के बावजूद आज तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी को न्याय प्रणाली से अंतिम सजा नहीं मिल सकी है। केस वर्षों तक अदालती प्रक्रिया में फंसे रहते हैं, और निलंबन झेल चुके अफसर कुछ समय बाद वापस बहाल होकर उसी व्यवस्था का हिस्सा बन जाते हैं।

बीते वर्षों के प्रमुख अग्निकांड और दिखावे की कार्रवाई

15 नवंबर 2024 - झांसी का महारानी लक्ष्मी बाई मेडिकल कॉलेज: उत्तर प्रदेश के झांसी के महारानी लक्ष्मी बाई मेडिकल कॉलेज के NICU वार्ड में ऑक्सीजन कंसंट्रेटर के पास शॉर्ट सर्किट की वजह से आग फैली। इस दर्दनाक हादसे में 17 नवजात शिशुओं ने अपनी जान गंवा दी।

क्या हुई कार्रवाई: जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि इलेक्ट्रिकल सिस्टम में ऑटोमैटिक कट-ऑफ न होना और शॉर्ट सर्किट ही मुख्य कारण था। मेंटेनेंस एजेंसी पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए, लेकिन बुनियादी व्यवस्था वही रही।

झांसी मेडिकल कॉलेज में लगी थी आग

25-26 मई 2024 - बेबी केयर न्यूबॉर्न अस्पताल: दिल्ली के विवेक विहार स्थित बेबी केयर न्यूबॉर्न अस्पताल में अवैध ऑक्सीजन रिसाव और सिलेंडर विस्फोट से आग लगी थी, जिसमें 7 नवजात बच्चों की जान गई थी।

क्या हुई कार्रवाई: निजी अस्पताल होने के कारण मालिक डॉ। नवीन खीची और ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर डॉ। आकाश को गैर-इरादतन हत्या के तहत गिरफ्तार कर लिया था। दोनों आरोपी जमानत पर है।

8 नवंबर 2021 - कमला नेहरू अस्पताल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के कमला नेहरू अस्पताल (हमीदिया अस्पताल परिसर) की तीसरी मंजिल पर स्थित एसएनसीयू में शॉर्ट सर्किट से आग लगी थी, जिसमें शुरुआती दौर में ही 4 नवजात बच्चों की झुलसने व दम घुटने से मृत्यु हो गई थी।

क्या हुई कार्रवाई: गांधी मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अररिया और हमीदिया अस्पताल के अधीक्षक डॉ. लोकेंद्र दवे को उनके पदों से हटा दिया गया था। गैस राहत विभाग के संचालक डॉ. केके दुबे को निलंबित कर दिया गया था।

भोपाल के कमला नेहरू अस्पताल में अग्निकांड का दृश्य

9 जनवरी 2021 - भंडारा जिला सरकारी अस्पताल: महाराष्ट्र के भंडारा जिला अस्पताल की एसएनसीयू यूनिट में तड़के रेडिएंट वार्मर में शॉर्ट सर्किट होने से धुआं और आग फैली, जिसमें 10 नवजात शिशुओं की मौत हुई थी।

क्या हुई कार्रवाई: संविदा नर्स स्मिता अमगाडे और शुभांगी सथवाने को हटा दिया गया था। जिला सिविल सर्जन डॉ. प्रमोद खंडारे को निलंबित किया गया था।

महाराष्ट्र में 44,000 की मौत : रोहित पवार

अमरावती के जिला महिला अस्पताल में आग लगने से 3 नवजातों की मौत की घटना के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार ने राज्य सरकार पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में आग लगने से मासूम बच्चों की मौत होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। केवल किसी एक अधिकारी को निलंबित करने या खानापूर्ति की जांच से समस्या का समाधान नहीं होगा।

रोहित पवार ने महाराष्ट्र में बाल मृत्यु के आंकड़ों पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने दावा किया कि पिछले तीन वर्षों में महाराष्ट्र में पांच वर्ष से कम उम्र के 44 हजार बच्चों की मौत कुपोषण, सर्पदंश और समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि इनमें अधिकांश बच्चे गरीब परिवारों से हैं और आंगनवाड़ियों में बच्चों को बेहद खराब गुणवत्ता का भोजन दिया जा रहा है।

दर्ज हो आपराधिक मामला

रोहित पवार ने कहा कि भंडारा और अब अमरावती में हुई घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सरकार को अगले छह महीनों में राज्य के सभी अस्पतालों का सुरक्षा ऑडिट पूरा कर कमियां दूर करनी चाहिए। किसी कर्मचारी को निलंबित कर मामले को दबाने के बजाय लापरवाही करने वाले ठेकेदारों के खिलाफ सीधे आपराधिक मामला दर्ज किया जाना चाहिए।

शरद पवार गुट के नेता रोहित पवार ने सवाल किया कि नागपुर में पिछले 3 महीनों में कथित तौर पर 32 हत्याएं हुई हैं तो गृह मंत्री से इस संबंध में सीधे सवाल क्यों नहीं पूछने दिए गए?

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