Gondia Water Supply Crisis: अर्जुनी मोरगांव तहसील के खांबी और शिरेगांव क्षेत्रीय जलापूर्ति योजनाओं पर आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। पिछले 19 वर्षों से बिना किसी नियमित सरकारी अनुदान के जलापूर्ति मंडलों के माध्यम से संचालित इन दोनों योजनाओं से करीब 30 गांवों को पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। नागरिकों से हर माह चंदा लेकर योजनाओं का खर्च चलाया जा रहा है। हालांकि बढ़ते बिजली बिल, रखरखाव, मरम्मत और प्रशासनिक खर्च के कारण पिछले दो वर्षों से दोनों योजनाएं भारी आर्थिक घाटे में चल रही हैं। वर्तमान में प्रत्येक ग्राहक से प्रतिमाह 200 रु. चंदा लिया जा रहा है, इसके बावजूद खर्च पूरा नहीं हो पा रहा है। दोनों योजनाओं पर करीब 20 से 25 लाख रु. की आर्थिक देनदारी जमा हो चुकी है।
बिजली वितरण कंपनी का बिल भी बड़ी मात्रा में बकाया है। बकाया बिल के चलते बिजली आपूर्ति काटने की नोटिस भी संबंधित जलापूर्ति मंडलों को मिल चुकी है। आर्थिक संकट के चलते मार्च 2025 में भी योजनाओं को बंद करने का निर्णय लिया गया था। उस समय तत्कालीन जिला परिषद अध्यक्ष और मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने मध्यस्थता कर संचालन से होने वाली आर्थिक कमी जिप की ओर से भरने का आश्वासन दिया था। इसके बाद जनहित को देखते हुए जलापूर्ति मंडलों ने योजना जारी रखने का निर्णय लिया था। लेकिन अब तक आर्थिक घाटे की भरपाई नहीं होने से स्थिति और गंभीर हो गई है।
इसी कारण जलापूर्ति मंडलों ने 1 सितंबर से दोनों योजनाएं बंद करने का निर्णय लिया है। यदि योजना बंद हुई तो करीब 30 गांवों के नागरिकों को भीषण जलसंकट का सामना करना पड़ सकता है। इस गंभीर स्थिति को लेकर सुजल सामाजिक सेवा संस्था के अध्यक्ष किशोर तरोणे के नेतृत्व में जिप सीईओ से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा गया। इसमें योजना बंद होने की स्थिति में उत्पन्न होने वाले जलसंकट की जिम्मेदारी जिला परिषद द्वारा स्वीकार करने तथा नागरिकों की परेशानी दूर करने के लिए तत्काल आर्थिक व प्रशासनिक उपाय करने की मांग की गई।
साथ ही भविष्य में दोनों क्षेत्रीय जलापूर्ति योजनाओं को जलापूर्ति नीति 2026 के अनुसार सक्षम तरीके से संचालित करने के लिए शासन स्तर से आवश्यक निधि और स्थायी आर्थिक प्रावधान करने की मांग भी की गई। प्रतिनिधि मंडल में शिरेगांव जलापूर्ति मंडल के सचिव नीलकंठ बोरकर तथा सुजल संस्था के सचिव कालिदास पुस्तोडे का समावेश था। सीईओ ने मामले की गंभीरता से दखल लेते हुए सकारात्मक विचार करने का आश्वासन दिया। साथ ही संबंधित अधिकारियों और जलापूर्ति मंडलों की तत्काल बैठक बुलाकर समस्या का समाधान निकालने की बात कही। अब 30 गांवों का जलापूर्ति संकट टालने के लिए जिला परिषद प्रशासन क्या निर्णय लेता है, इस ओर नागरिकों की नजरें लगी हैं।