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गोंदिया

गौण खनिज अवैध परिवहन पर लगेगा अंकुश, वाहनों के लिए जीपीएस अनिवार्य; जुलाई से होगा क्रियान्वयन

नवभारत डेस्क

गोंदिया. अवैध गौण चोरी और सरकार के द्वारा तय क्षमता से अधिक ढुलाई नहीं हो सकेगी. राज्य भर में अब खनिजों का परिवहन करनेवाले सभी वाहनो में जीपीएस डिवाइस लगाना अनिवार्य कर दिया गया है. यह कदम खनिजों की चोरी, अवैध परिवहन और वाहनों पर क्षमता से अधिक माल उठाने पर रोक लगाने के उद्देश्य से उठाया गया है.

राज्य सरकार ने गौण खनिज अवैध उत्खनन के खिलाफ सख्त नीति अपनाई है और इनके परिवहन वाले वाहनों के लिए जीपीएस (भौगोलिक सूचना) प्रणाली लगाना अनिवार्य कर दिया है.  जिससे गौण खनिजों का अवैध परिवहन  में शामिल वाहनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की है. वाहनों में लगे जीपीएस सिस्टम को संबंधित जिले में खनिकर्म विभाग व आरटीओ विभाग के जीपीएस सिस्टम से जोड़ा जाएगा. इसके लिए पुणे की"महाखनिज" एजेंसी को काम दिया गया है.

इससे जिले में अवैध गौण खनिज परिवहन पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी. इन वाहनों में 1 जुलाई 2022 के बाद जीपीएस नहीं लगा होने की जानकारी मिलने पर वह उत्खनन व  परिवहन अवैध मानकर  संबंधितों के  खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. खदान पट्टा धारक,  क्रशर संचालकों, गौण खनिजों का परिवहन करने वाले वाहन मालिकों को अपने वाहनों पर जीपीएस लगाने और उसे महाखनिज इस  कम्प्यूटर सिस्टम से जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं.

अवैध यातायात पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने जीपीएस सिस्टम शुरू किया है. जिससे ऐसे वाहन के बारे में आसानी से पता चल जाएगा और अवैध उत्खनन पर अंकुश लगेगा. खनिजों का परिवहन करने वाले वाहनों पर जीपीएस सिस्टम  स्थापित करने के निर्णय से  चोरी और अवैध  यातायात की घटनाओं में कमी आकर शासन को भी अधिक राजस्व मिलने की संभावना व्यक्त की जा रही है.  

वाहनों की ट्रैकिंग हो सकेगी

गौण खनिज का अवैध कारोबार व  क्षमता से अधिक मात्रा में माल का परिवहन, गौण खनिज का अवैध रूप से उत्खनन कर परिवहन  पर  निगरानी रखने की कोई प्रभावी यंत्रणा नहीं होने से  दिन-ब-दिन इस प्रकार की कारगुजारियों के बढ़ने की बात ध्यान में आई है.  इसे रोकने के लिए खनिजों का परिवहन करने वाले वाहनों को जीपीएस सिस्टम स्थापित करना  आवश्यक किया गया है. महाखनिज को सर्वर कंट्रोल का काम होगा. जीपीएस के जरिये ट्रैक किया जाएगा कि खनिज लेकर वाहन कहां गया, किस गाड़ी में कितनी मात्रा में खनिजों का उठाव हुआ और वह तय परमिट और रूट के बजाय कहीं और तो नहीं ले जाया गया. इस व्यवस्था से ऐसी घटनाओं पर नियंत्रण किया जा सकेगा.

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