Tirora Food Safety: आमगांव शहर की सड़कें संकरी है। ऐसे में इन संकरी सड़कों पर अगर बड़े वाहन पहुंच जाते हैं तो जाम की स्थिति निर्माण हो ही जाती है। जिसके लिए प्रशासन की ओर से शहर के कुछ मार्गों पर बड़े वाहनों के आवाजाही पर प्रतिबंध लगाया गया है।
बावजूद बड़े ट्रकों को बाजार के संकरे मार्गों पर डाल दिया जाता है। जिससे यह वाहन फंस जाते हैं और कई देर तक आवागमन प्रभावित होता है। वहीं आवागमन करने वाले अन्य छोटे वाहन चालकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
तिरोड़ा शहर में सड़क किनारे लगने वाले खान पान के ठेलों में खुले में रखे खाद्य पदार्थ नागरिकों की सेहत बिगाड़ रहे हैं। खानेपीने का सामान खुले में बिक रहा है। ऐसे में दूषित पदार्थ खाने से लोगों की सेहत पर असर हो रहा है। इस ओर अन्न व औषधि विभाग का ध्यान नहीं है। शाम होते ही शहर के विभिन्न स्थानों पर अनेक प्रकार के चाईनीज, साउथ इंडियन, नार्थ इंडियन और अन्य प्रकार के खाद्य पदार्थों के ठेले सज जाते हैं, जहां पर साफ सफाई का कोई ध्यान नहीं दिया जाता है।
आदिवासी क्षेत्र होने के कारण शासकीय कर्मचारियों को अपने कार्यालयों में ही रहने का आवासीय भत्ता दिया जाता है, लेकिन शासन की आखों में धुल झोंककर रोज 20 से 50 किमी। दूरी से बस या ट्रेनों से अपडाऊन करते हैं, तो कुछ कर्मचारी मोटरसाईकिल से आना जाना करते हैं। जिसके कारण नागरिकों को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलता है।
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अनेक योजनाओं का कार्यान्वयन मात्र कागजों पर ही होता है। अधिकारी व कर्मी कार्यालयों में मर्जी से आतेजाते हैं तथा फर्जी कागजों के द्वारा शासन को चुना लगाने का काम करते हैं। कुछ योजनाएं तो संबंधित शासकीय यंत्रणा के गलत रवैये से समय के पहले ही दम तोड़ देती है।