Gondia Atrocities Act Awareness Workshop: अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों पर होने वाले अत्याचारों को रोकने के लिए अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 तथा संशोधित अधिनियम, 2016 महत्वपूर्ण कानून है। इस कानून का प्रभावी क्रियान्वयन कर अत्याचार से जुड़े अपराधों पर रोक लगाने के लिए संबंधित विभाग समन्वय के साथ काम करें।
साथ ही कानून के प्रावधानों को लेकर नागरिकों में व्यापक जनजागृति कर अपराधों का प्रमाण कम करने के प्रयास करें। ऐसा प्रतिपादन अपर जिलाधिकारी अभिजीत घोरपड़े ने 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर सामाजिक न्याय भवन के सभागृह में एट्रासिटी कानून को लेकर आयोजित जनजागरूकता व मार्गदर्शन कार्यशाला में किया।
कार्यक्रम में एड. भीमराव हटकर, बार्टी के प्रशिक्षण विभाग प्रमुख बबन जोगदंड, जिला सूचना अधिकारी अंजु निमसरकर, बार्टी के परियोजना प्रबंधक शरद शिंदे, जिला विधि सेवा प्राधिकरण के सचिव नरेश वालके, समाज कल्याण सहायक आयुक्त किशोर भोयर तथा जिला समाज कल्याण अधिकारी भारती वरुडकर प्रमुख रूप से उपस्थित थे।
घोरपड़े ने कहा कि युवाओं में सामाजिक परिवर्तन लाने की बड़ी क्षमता है। संविधान के अनुच्छेद 17 के अनुसार अस्पृश्यता उन्मूलन को मजबूती देना, समाज में समानता स्थापित करना, अनुसूचित जाति व जनजाति के लोगों को उत्पीड़न और अत्याचार से कानूनी संरक्षण देना तथा अत्याचार पीड़ितों को तत्काल सहायता, सुरक्षा व आर्थिक मुआवजा उपलब्ध कराना कानून के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है।
इन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए प्रशासन, पुलिस विभाग और समाज को मिलकर काम करने की आवश्यकता है। एड. हटकर ने कहा कि अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के लोगों के साथा होने वाले अन्याय और अत्याचार को रोकने के लिए वर्ष 1989 में अत्याचार निवारण कानून लागू किया गया। पुलिस, राजस्व व सामाजिक न्याय विभाग पर इस कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी है। कानूनी उपाय उपलब्ध होने के बावजूद कुछ स्थानों पर पूर्वाग्रहपूर्ण मानसिकता के कारण भेदभाव किया जाता है। इसलिए सामाजिक प्रबोधन की
जिला विधि सेवा प्राधिकरण के सचिव नरेश वालके ने कहा कि भारतीय संविधान ने प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार और सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार दिया है। समाज के प्रत्येक वर्ग का सर्वांगीण विकास संविधान का मूल उद्देश्य है। विकसित भारत के निर्माण में शिक्षा का महत्वपूर्ण स्थान है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति शिक्षा प्राप्त कर अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहे। समाज कल्याण सहायक आयुक्त किशोर भोयर ने प्रस्तावना में अत्याचार निवारण कानून के क्रियान्वयन को लेकर विस्तृत जानकारी दी।