Gondia Nagar Parishad: गोंदिया नगर परिषद की स्थापना 1 अप्रैल 1920 को हुई थी और इस वर्ष संस्था ने 106 वर्ष पूरे कर लिए हैं। वहीं नगर परिषद के मुख्य कार्यालय इमारत का निर्माण वर्ष 1980 में हुआ था, जिसे अब 46 वर्ष पूरे हो चुके हैं। समय के साथ यह इमारत पूरी तरह जर्जर हो चुकी है और इसकी हालत चिंता का विषय बन गई है।
इस इमारत में नगर परिषद के कई महत्वपूर्ण विभाग संचालित होते हैं, जहां करीब 200 अधिकारी और कर्मचारी कार्यरत हैं। गोंदिया शहर की आबादी लगभग 1.80 लाख है। जन्ममृत्यु पंजीयन, संपत्ति कर जमा करना, इमारत निर्माण अनुमति, विभिन्न प्रमाणपत्र तथा अन्य कार्यों के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में नागरिक नगर परिषद कार्यालय पहुंचते हैं। ऐसे में कार्यालय परिसर में हमेशा लोगों की आवाजाही बनी रहती है।
नगर परिषद परिसर में दो इमारत हैं, जिनमें से एक पुरानी इमारत अत्यंत जर्जर हो चुकी है और उसके कभी भी ढहने की आशंका जताई जा रही है। बरसात के दौरान इमारत में लगातार पानी टपकने से छत और दीवारों का प्लास्टर गिर रहा है। शुक्रवार को हुई बारिश के दौरान नगर परिषद के उपमुख्याधिकारी के कक्ष का प्लास्टर भी अचानक गिर गया। सौभाग्य से उस समय वहां कोई मौजूद नहीं था, जिससे बड़ा हादसा टल गया। लेकिन, खतरा अभी भी बना हुआ है।
आम तौर पर शहर में किसी जर्जर इमारत के गिरने की आशंका होने पर नगर परिषद इमारत मालिक को नोटिस जारी कर इमारत खाली करने या गिराने के निर्देश देती है। यदि मालिक कार्रवाई नहीं करता तो नगर परिषद स्वयं उसे ध्वस्त कराती है।
लेकिन जब नगर परिषद का अपनी ही इमारत खतरनाक स्थिति में पहुंच गई है और वहां कार्यरत कर्मचारियों व आने वाले नागरिकों की जान जोखिम में है, तो सवाल उठ रहा है कि नगर परिषद को नोटिस आखिर कौन देगा। शहरवासियों का कहना है कि यदि नियम लागू कराने वाली संस्था ही सुरक्षा मानकों की अनदेखी करेगी, तो आम लोगों से नियमों के पालन की अपेक्षा कैसे की जा सकती है।
जर्जर इमारत को लेकर चारों ओर से हो रही आलोचना के बाद नगर परिषद के मुख्याधिकारी संदीप बोरकर ने शनिवार को तत्काल आदेश जारी कर जर्जर इमारत में संचालित सभी कार्यालयों को इंदिरा गांधी संकुल परिसर में स्थानांतरित करने के निर्देश दिए। सोमवार से विभिन्न विभागों के कार्यालय नए स्थान पर स्थानांतरित कर दिए गए।
गोंदिया नगर परिषद को विभिन्न टैक्स के माध्यम से हर वर्ष करोड़ों रु. का राजस्व प्राप्त होता है। इसके अलावा राज्य सरकार में सत्तारूढ़ दल के प्रभावशाली जनप्रतिनिधियों का भी इस क्षेत्र को समर्थन प्राप्त है। इसके बावजूद नगर परिषद के लिए एक आधुनिक और सुरक्षित नई इमारत का निर्माण अब तक क्यों नहीं हो सका, यह सवाल नागरिकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
नगर परिषद की इमारत जर्जर हो गई है। वहीं बारिश के समय में कर्मचारी जान हथेली पर रखकर कार्य कर रहे हैं। इसी बीच सोमवार, 7 जुलाई को नगर परिषद के टैक्स विभाग में स्लैब का प्लाटर अचानक गिर गया। इस दौरान कार्यालय में उपस्थित कर्मचारी बाहर चले गए। जिससे जनहानी टल गई।