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गोंदिया जिले के आमगांव तहसील स्थित किडंगीपार रेलवे फाटक पर प्रतिदिन हजारों नागरिकों की परेशानी को देखते हुए रेलवे ओवरब्रिज निर्माण की मांग उठाई गई है।
मुंबई-कोलकाता रेल मार्ग पर यात्री और मालगाड़ियों की आवाजाही अधिक होने के कारण रेलवे फाटक बार-बार बंद होता है।
रेलवे फाटक बंद होने से आपातकालीन स्थिति में एंबुलेंस भी फंस सकती है।
Kidangipar ROB Construction Demand: गोंदिया जिले के आमगांव तहसील के किडंगीपार स्थित गोंदिया मार्ग के रेलवे फाटक पर रेलवे ओवरब्रिज निर्माण की मांग अब बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। इस रेलवे फाटक के कारण प्रतिदिन हजारों नागरिकों को यातायात संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इस गंभीर जनसमस्या की ओर जनप्रतिनिधियों द्वारा तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। किडंगीपार का रेलवे फाटक मुंबई-कोलकाता के महत्वपूर्ण रेल मार्ग पर स्थित है। इस मार्ग से बड़ी संख्या में यात्री ट्रेनें व मालगाड़ियां गुजरती हैं।
इसके कारण रेलवे फाटक बार-बार बंद करना पड़ता है। परिणामस्वरूप गोंदिया मार्ग से आवागमन करने वाले नागरिकों को काफी समय तक फाटक खुलने का इंतजार करना पड़ता है। कई बार 10 से 15 मिनट तो कभी आधे घंटे या उससे भी अधिक समय तक रेलवे फाटक बंद रहता है। जिससे वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। दोपहिया, चारपहिया, यात्री वाहन, मालवाहक वाहन तथा विद्यार्थियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
इस समस्या का सबसे गंभीर पहलू यह है कि आपातकालीन परिस्थितियों में एंबुलेंस को भी रेलवे फाटक बंद होने के कारण रुकना पड़ता है। किसी मरीज को तत्काल अस्पताल पहुंचाने की आवश्यकता होने पर कुछ मिनटों की देरी भी गंभीर साबित हो सकती है। ऐसी स्थिति में मरीजों और उनके परिजनों को भारी मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों और व्यापारियों को भी इस समस्या से जूझना पड़ता है। साथ ही ईंधन की अतिरिक्त खपत और यातायात जाम के कारण आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है।
इस जनसमस्या की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) उप जिलाध्यक्ष बालू वंजारी ने सांसद डॉ. नामदेवराव किरसान तथा विधायक संजय पुराम से नागरिकों की ओर से विशेष अपील करते हुए मांग की है कि इस समस्या को प्राथमिकता देते हुए किडंगीपार रेलवे फाटक पर रेलवे ओवरब्रिज निर्माण के लिए रेल मंत्रालय व संबंधित विभागों के समक्ष प्रभावी ढंग से मामला उठाया जाए, इस स्थान का तत्काल सर्वेक्षण करवाकर आवश्यक तकनीकी व प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करें। परियोजना का प्रस्ताव प्रस्तुत कर आवश्यक निधि मंजूर करवाने के लिए पहल करें। केवल आश्वासन देने के बजाय इस जनहित के कार्य को धरातल पर उतारने के लिए दोनों जनप्रतिनिधियों को मिलकर प्रयास करना चाहिए।