Kharif Sowing (सोर्सः एआय जनरेटेड फोटो- सोशल मीडिया) 
गोंदिया

गोंदिया में खरीफ सीजन की तैयारियां अंतिम चरण में, किसानों को जोरदार बारिश का इंतजार

Kharif Season: गोंदिया में खरीफ सीजन की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं और किसान अब मानसून की बारिश का इंतजार कर रहे हैं। किसान बीज, खाद, कृषि दवाओं और पशुओं के चारे की व्यवस्था में जुटे है।

महाराष्ट्र डेस्क

Gondia Farmers Preparation: मृग नक्षत्र के आगमन के साथ ही जिले के किसान मानसून की बेसब्री से प्रतीक्षा कर रहे हैं। खरीफ सीजन की पूर्व तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी है और खेतों में अंतिम चरण की मशागत का काम चल रहा है। किसान बीज, खाद और कृषि दवाओं की व्यवस्था करने में जुटे हैं, जबकि पशुओं के लिए चारे का भी इंतजाम किया जा रहा है।भीषण गर्मी के बीच मृग नक्षत्र नजदीक आने से किसानों की उम्मीदें बढ़ गई है। किसानों का मानना है कि यदि इस नक्षत्र में अच्छी बारिश होती है तो खरीफ सीजन बेहतर रहेगा।

पांढ़राबोड़ी गांव के किसान ईशुलाल चव्हाण का कहना है कि खेतों की जुताई और गोबर खाद डालने का काम पूरा हो चुका है। अब सिर्फ अच्छी बारिश का इंतजार है। समय पर बारिश होने पर धान की फसल को फायदा होगा और खेतों की मेड़ों पर तुअर की बुआई भी की जाएगी। कृषि विभाग ने इस वर्ष जिले में 2,05,780 हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुआई का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए लगभग 56,834 क्विंटल बीज की आवश्यकता का अनुमान लगाया गया है।

मृग नक्षत्र पर टिकी किसानों की उम्मीदें

विभाग ने किसानों को प्रमाणित बीजों का उपयोग करने तथा पर्याप्त नमी आने के बाद ही बुआई करने की सलाह दी है। कई किसानों का कहना है कि खेती के कार्यों में मजदूरों की कमी के कारण समय पर काम पूरा करना मुश्किल हो रहा है।

मजदूरों की कमी से खेती प्रभावित

गिरोला के किसान अजीत मेश्राम ने बताया कि उनकी तीन से चार एकड़ कृषि भूमि है और खेती की अधिकांश तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। लेकिन, मजदूरों की कमी के कारण कई बार खेती के कार्य समय पर नहीं हो पाते।

2.05 लाख हेक्टेयर में खरीफ बुआई का लक्ष्य

बारिश के मौसम में चारे की कमी न हो। इसके लिए किसान अभी से पशुओं के लिए चारा की व्यवस्था कर रहे हैं। जिन क्षेत्रों में पर्याप्त चारा उपलब्ध नहीं है, वहां किसान बाहर से चारा खरीदने को मजबूर हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में किसान खेती की तैयारियों के साथसाथ पशुधन की जरूरतों पर भी विशेष ध्यान दे रहे हैं। पिछले वर्ष जिले के किसानों को अतिवृष्टि और बाढ़ का भारी नुकसान झेलना पड़ा था। आसमान पर टिकी किसानों की नजरेंखरीफ सीजन की शुरुआत में समय पर बारिश होने से किसानों में उत्साह था, लेकिन बाद में लगातार हुई भारी बारिश ने तबाही मचा दी।

खेत तैयार, बीज-खाद की व्यवस्था पूरी

जुलाई और अगस्त में जिले में चार बार बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हुई थी, जिससे किसानों की फसलें और मेहनत दोनों प्रभावित हुई थीं। अब किसान नई उम्मीदों के साथ खरीफ सीजन की शुरुआत का इंतजार कर रहे हैं। अधिकांश खेतों की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और किसानों की निगाहें आसमान पर टिकी हैं। सभी को उम्मीद है कि इस वर्ष मानसून संतुलित रहेगा और पिछले साल जैसी प्राकृतिक आपदा का सामना नहीं करना पड़ेगा।

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