HIV Awareness Program Maharashtra: वित्तीय वर्ष 2025-26 में जहां एक ओर राज्य के कुल 611 एचआईवी संक्रमित मरीजों में से लगभग आधे मरीजों ने बीच में ही इलाज छोड़ दिया है, वहीं दूसरी ओर गोंदिया जिले से राहत की खबर सामने आई है। वर्ष 2024-25 की तुलना में जिले में नए मरीजों की संख्या में 57 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि गोंदिया जिले में वर्तमान में ऐसा कोई भी मरीज नहीं है, जो साल के बीच में अपना इलाज छोड़ देता हो। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग के लिए एकमात्र चिंताजनक और चुनौतीपूर्ण बात नए एचआईवी रोगियों का मिलना है।
स्वास्थ्य विभागों के बढ़ते नेटवर्क, परामर्शदाताओं द्वारा घर-घर जाकर सीधे की जा रही पहल और 'सामुदायिक ट्रैकिंग' प्रणाली ने जिले में प्रभावित रोगियों को मुख्यधारा के उपचार में लगातार बनाए रखने की दर में बड़ी वृद्धि की है। 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक की वार्षिक अवधि के दौरान जिले में किए गए कुल 39,000 परीक्षणों में से केवल 82 नए मामले पाए गए हैं। गोंदिया जिले में व्यापक स्तर पर हो रहे परीक्षणों और सटीक परामर्श की संख्या के कारण अब जांच का दायरा तो बढ़ रहा है, लेकिन वास्तविक रोगियों की संख्या लगातार कम हो रही है।
जिले में एचआईवी पीड़ितों की सहायता के लिए एआरटी केंद्र और लिंक एआरटी केंद्र पूरी सक्रियता से काम कर रहे हैं। यह सुविधाएं जिला अस्पतालों, उपजिला अस्पतालों और चयनित ग्रामीण अस्पतालों में सुचारू रूप से कार्य कर रही हैं। इन केंद्रों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां आने वाले सभी मरीजों की व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह से गुप्त रखी जाती है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक समर्पित टीम द्वारा स्थानीय स्तर पर मरीजों को मुफ्त परामर्श, मुफ्त रक्त परीक्षण और उचित चिकित्सा पर्यवेक्षण नियमित रूप से प्रदान किया जाता है।
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गोंदिया जिला शल्य चिकित्सक डॉ. पुरुषोत्तम पटले ने कहा हेै कि "एचआईवी रोगियों द्वारा दवा बंद करना उनके स्वास्थ्य के लिए बहुत खतरनाक हो सकता है। यदि दवा आंशिक रूप से बंद कर दी जाती है, तो वायरस शरीर में पुनः सक्रिय हो जाता है और दवा का प्रतिसाद नहीं देता। जैसे-जैसे नागरिक इसके परीक्षण के लिए आगे आते हैं, निदान समय पर होता है। इससे प्रभावितों को समय पर इलाज मिल रहा है। ये महंगे उपचार नियमित रूप से एआरटी केंद्रों पर निःशुल्क - प्रदान किए जाते हैं। यदि नियमित उपचार जारी रखा - जाए तो सामान्य जीवन जिया जा सकता है।"