Gondia Election: स्नातक चुनाव को लेकर जिले में आदर्श आचार संहिता लागू है। चुनावी प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और समान अवसर के सिद्धांतों के अनुरूप बनाए रखने के लिए राजनीतिक प्रचार-प्रसार और सार्वजनिक स्थानों पर लगने वाली प्रचार सामग्री पर निर्वाचन प्रशासन की कड़ी निगरानी अपेक्षित है। इसके बावजूद गोरेगांव शहर और तहसील के विभिन्न हिस्सों में नेताओं के जन्मदिन व शुभकामना संदेशों वाले बैनर-पोस्टर दिखाई देने से चुनावी माहौल में सवाल खड़े हो गए हैं।
शहर के कई चौक-चौराहों और प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर बड़े आकार के बैनर-पोस्टर लगाए जाने की चर्चा है। इन प्रचार सामग्रियों में नेताओं के फोटो के साथ राजनीतिक दलों की पहचान और चुनाव चिन्ह नजर आने की बात सामने आ रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी राजनीतिक गतिविधियों से जुड़ी प्रचार सामग्री दिखाई देने की जानकारी स्थानीय स्तर पर सामने आ रही है।
जन्मदिन की शुभकामनाएं या राजनीतिक प्रचार आचार संहिता के दौरान जन्मदिन, अभिनंदन अथवा शुभकामना संदेशों के नाम पर लगाए जाने वाले बैनरों की सामग्री और उद्देश्य की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है। यदि किसी बैनर में राजनीतिक दल, संभावित प्रत्याशी, चुनाव चिन्ह प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष चुनावी प्रचार दिखाई देता है, तो उसकी वैधता और अनुमति की जांच निर्वाचन अधिकारियों द्वारा नियमों के अनुसार की जाए। हालांकि, किसी विशेष बैनर को आचार संहिता का उल्लंघन घोषित करने से पहले उसकी वास्तविक सामग्री, स्थान, अनुमति और परिस्थितियों की आधिकारिक जांच आवश्यक है। यही कारण है कि अब निगाहें निर्वाचन प्रशासन की जांच और कार्रवाई पर टिकी हैं।
जब आदर्श आचार संहिता लागू है, तो सार्वजनिक स्थानों पर लगे राजनीतिक बैनर-पोस्टरों की जांच कौन कर रहा है? क्या इन बैनरों के लिए संबंधित विभाग से अनुमति ली गई है? यदि अनुमति नहीं ली गई है, तो इन्हें हटाने की कार्रवाई कब की जाएगी?
स्थानीय नागरिकों के अनुसार गोरेगांव शहर के कई प्रमुख स्थानों पर राजनीतिक चेहरों वाले बैनर-पोस्टर दिखाई दे रहे है। चुनावी माहौल में सार्वजनिक स्थानों पर इस तरह की राजनीतिक दृश्यता ने प्रशासन की निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
गोरेगांव चुनाव अधिकारी प्रज्ञा भोकरे ने कहा कि आदर्श आचार संहिता लागू है ऐसे में नियमों का पालन जरूरी है, शहर से बैनर पोस्टर तत्काल हटाने के निर्देश जाहिर किए गए हैं, नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कानून के तहत कार्रवाई की जाएंगी, चुनाव आयोग राजनीतिक दलों की हलचलों पर नजर बनाए हुए है।
गोरेगांव में आचार संहिता के बीच दिखाई दे रहे इन बैनर-पोस्टरों को लेकर अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि चुनाव प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है। क्या संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचकर बैनर-पोस्टरों की जांच करेंगे? क्या बिना अनुमति या नियमों के विपरीत पाए जाने वाली प्रचार सामग्री हटाई जाएगी? और यदि जांच में आचार संहिता का उल्लंघन सामने आता है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी? इन सवालों के जवाब अब निर्वाचन प्रशासन की कार्रवाई से ही सामने आएंगे। चुनाव की निष्पक्षता और समान अवसर बनाए रखने के लिए प्रशासन की सक्रिय निगरानी और समयबद्ध कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।