Kharif Crop Loan
Gondia Kharif Crop Loan Distribution Report: आगामी खरीफ सीजन शुरू होने में अभी एक महीने से अधिक का समय शेष है, लेकिन गोंदिया जिले में किसानों को फसल कर्ज (क्रॉप लोन) बांटने की रफ्तार काफी सुस्त बनी हुई है। 15 मई 2026 तक की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, इस वित्तीय वर्ष के लिए जिले को दिए गए कुल लक्ष्य का केवल 35.10 प्रतिशत हिस्सा ही फसल कर्ज के रूप में आवंटित किया जा सका है। अब तक जिले के किसानों के बैंक खातों में सीधा 229 करोड़ 11 लाख रुपये जमा किए गए हैं। इस पूरी प्रक्रिया में गोंदिया जिला केंद्रीय सहकारी बैंक सबसे आगे दिखाई दे रहा है, जबकि राष्ट्रीयकृत और ग्रामीण बैंकों की सुस्ती लगातार जारी है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए गोंदिया जिले को फसली कर्ज वितरण के लिए कुल 495 करोड़ 32 लाख रुपये का बड़ा लक्ष्य दिया गया है। इसके मुकाबले 15 मई तक जिले के केवल 13,303 किसानों के खाते में सीधा कर्ज पहुंच सका है। वर्तमान रिपोर्ट को देखने से यह भी साफ होता है कि बैंकों द्वारा इस समय नए किसानों को ऋण देने के बजाय पुराने कर्ज खातों के नवीनीकरण (रिन्यूअल) पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। 15 मई तक बैंकों द्वारा किए गए कुल भुगतान में से अधिकांश राशि पुराने कर्ज खातों के एडजस्टमेंट और नवीनीकरण में ही उपयोग हुई है।
जिले में कार्यरत विभिन्न बैंकिंग सेक्टरों द्वारा फसल कर्ज वितरण की स्थिति कुछ इस प्रकार है:
खरीफ की बुआई का समय नजदीक आने के साथ ही जिला बैंक को छोड़कर ग्रामीण और राष्ट्रीयकृत बैंकों की कर्ज वितरण को लेकर यह उदासीन स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है।
किसानों के बीच चर्चा है कि राष्ट्रीयकृत व ग्रामीण बैंक की तुलना में जिला सहकारी बैंक में खरीफ फसल कर्ज वितरण की प्रक्रिया बेहद सरल और आसान है। यही वजह है कि स्थानीय किसानों को लगता है कि यह बैंक पूरी तरह उनका अपना है। जिला बैंक हर साल औसतन 350 करोड़ रुपये की लागत से लगभग 48,000 किसानों को फसल कर्ज वितरित कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देता है।
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लेकिन, इसके विपरीत सरकार के विभिन्न विभागों की महत्वपूर्ण निधियों और सरकारी पैसों को जिला सहकारी बैंकों में जमा करने के बजाय बड़े राष्ट्रीयकृत और निजी बैंकों में जमा किया जाता है। किसानों और जानकारों का मानना है कि यह एक तरह से रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले जिला सहकारी बैंक के साथ बड़ा अन्याय है। यदि जिला बैंक को सरकारी सहयोग मिले, तो किसानों को कर्ज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।