तिरोड़ा के बाद गोंदिया जिले की शेष सात तहसीलों को भी सूखाग्रस्त सूची में शामिल किए जाने की जानकारी।
गोंदिया, गोरेगांव, आमगांव, सालेकसा, देवरी, अर्जुनी मोरगांव और सड़क अर्जुनी को सूची में जगह मिलने का दावा।
24 सितंबर तक जिले में अपेक्षित बारिश की तुलना में करीब 95.2 प्रतिशत वर्षा दर्ज हुई।
बारिश के असमान वितरण और कीट-रोगों के कारण धान की फसल प्रभावित होने की बात सामने आई।
किसानों को अब आर्थिक सहायता और अन्य राहत उपायों के क्रियान्वयन का इंतजार।
Gondia Drought Affected Tehsils Farmers Relief: गोंदिया जिले की तिरोड़ा तहसील के बाद अब गोंदिया, गोरेगांव, आमगांव, सालेकसा, देवरी, अर्जुनी मोरगांव और सड़क अर्जुनी को भी सूखाग्रस्त सूची में शामिल किए जाने की जानकारी सामने आई है। कम बारिश, फसल को नुकसान और पानी की कमी से परेशान किसानों को अब सरकारी राहत उपायों का इंतजार है।
गोंदिया, कम बारिश, फसलों को नुकसान और पानी की कमी से जूझ रहे गोंदिया जिले के किसानों के लिए राहत की खबर सामने आई है। तिरोड़ा तहसील के बाद अब जिले की शेष सात तहसीलों को भी सूखाग्रस्त सूची में शामिल किए जाने की जानकारी है। इसके साथ ही जिले की सभी आठ तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किए जाने का दावा किया गया है।
राज्य में पहले करीब 265 तहसीलों को सूखाग्रस्त सूची में शामिल किया गया था। अब 40 और तहसीलों को सूची में जोड़े जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें गोंदिया जिले की सात तहसीलें शामिल होने से यहां के प्रभावित किसानों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
गोंदिया जिले की शेष तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग गोंदिया विधानसभा क्षेत्र के विधायक विनोद अग्रवाल और तिरोड़ा-गोरेगांव क्षेत्र के विधायक विजय रहांगडाले ने सरकार के सामने रखी थी। पहले केवल तिरोड़ा तहसील को सूखाग्रस्त घोषित किए जाने के बाद जिले के अन्य क्षेत्रों के किसानों ने भी राहत की मांग उठाई थी।
अब गोंदिया, गोरेगांव, आमगांव, सालेकसा, देवरी, अर्जुनी मोरगांव और सड़क अर्जुनी को भी सूची में शामिल किए जाने की जानकारी है। किसानों का कहना है कि कम बारिश और फसल नुकसान को देखते हुए प्रभावित क्षेत्रों को राहत देना जरूरी है।
इस वर्ष जिले में मानसून की शुरुआत करीब एक महीने की देरी से हुई। जुलाई में अच्छी बारिश दर्ज हुई, लेकिन अगस्त में बारिश का वितरण असमान रहा। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 24 सितंबर तक जिले में 1,167.3 मिमी बारिश अपेक्षित थी, जबकि वास्तविक वर्षा 1,136.02 मिमी दर्ज की गई। यह अपेक्षित बारिश का करीब 95.2 प्रतिशत है।
पिछले वर्ष की तुलना में भी लगभग 4 प्रतिशत कम बारिश दर्ज होने की जानकारी है। बारिश की कमी और कीट-रोगों के प्रकोप के कारण धान की फसल प्रभावित हुई, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई।
सभी तहसीलों को सूखाग्रस्त सूची में शामिल किए जाने की खबर से किसानों को राहत की उम्मीद है। हालांकि, प्रभावित किसानों को कितनी आर्थिक सहायता मिलेगी और राहत उपायों का क्रियान्वयन कब शुरू होगा, इस पर नजर बनी हुई है। किसानों की मांग है कि सरकार जल्द सहायता की घोषणा कर उसका लाभ पात्र किसानों तक पहुंचाए।