बाल विवाह ( सोर्स: सोशल मीडिया ) 
गोंदिया

गोंदिया में 5 साल में 18 बाल विवाह रोके गए, गुप्त सूचना पर कार्रवाई, मौके पर पहुंचकर रोकी गई शादियां

Gondia Child Marriage: गोंदिया में महिला व बाल विकास विभाग की सतर्कता से बीते पांच वर्षों में 18 बाल विवाह रोके गए, जिससे कई नाबालिग लड़कियों का भविष्य सुरक्षित हुआ।

अंकिता पटेल

Child Marriage Prevention: गोंदिया महिला व बाल विकास विभाग की लगातार जागरूकता और कठोर पहल करने की वजह से पिछले पांच सालों में 18 बाल विवाह रोके गए हैं। इससे कई नाबालिग लड़कियों की पढ़ाई, सेहत और भविष्य सुरक्षित हुआ है।

बाल विवाह रोकथाम कानून के अनुसार, अगर लड़की की उम्र 18 साल से कम और लड़के की उम्र 21 साल से कम है तो विवाह जुर्म है। फिर भी, सामाजिक दबाव, अज्ञानता और परंपरा के नाम पर कुछ जगहों पर बाल विवाह सामने आ रहे थे।

इसे गंभीरता से लेते हुए महिला व बाल विकास विभाग ने रोकथाम अधिकारी, आंगनवाड़ी सेविका, आशा सेविका, पुलिस प्रशासन और स्थानीय संस्थाओं के साथ मिलकर इसे रोकने के लिए तुरंत कदम उठाए। गुप्त जानकारी के आधार पर कई जगहों पर अचानक जाकर शादियां रुकवाई गई।

ग्रामीण कर्मचारी ही प्रतिबंधित अधिकारी

3 जून 2013 को जारी सूचना के अनुसार, साथ ही बाल विवाह प्रतिबंध कानून - 2006 के धारा 16 के सब-धारा (1) और (3) के अनुसार, बाल विकास प्रकल्प अधिकारी (नागरी) व प्रकल्प में नियुक्त आंगनवाड़ी पर्यवेक्षिका व ग्राम पंचायत स्तर पर संबंधित ग्राम सेवक बाल विवाह प्रतिबंधक अधिकारी - घोषित किया गया है। इसलिए, उम्मीद है कि वे बाल विवाह को रोकने और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए और असरदार कोशिश करेंगे।

1098 पर कॉल कर संपर्क करें, नाम गोपनीय

अगर आपके क्षेत्र में कोई बाल विवाह हो रहा है, तो आप चाइल्ड लाइन के टोल-फ्री क्र। 1098 पर बता सकते हैं। इसके अलावा, महिला व बाल विकास विभाग के अधिकारी, पुलिस प्रशासन को बताकर भी बाल विवाह को रोका जा सकता है, प्रशासन जानकारी देने वालों का नाम गोपनीय रखता है। रेश्मा मोरे, जिला महिला व बाल विकास अधिकारी, गोंदिया

FIR तक नहीं पहुंची बात

पिछले पांच सालों में, जिला बालसंरक्षण कक्ष की टीम ने पूरे जिले में बाल विवाह रोकने के लिए अभियान चलाया है, जिसमें दोनों पक्षों को कानून के बारे में बताया गया है। एफआरईआर करने की नौबत न आए, इसके लिए लोगों में जागरूकता फैलाई गई।

समाज में बाल विवाह पर रोक लगाने का एक मजबूत संदेश गया है। इसके साथ ही, स्कूलों, महिला सभाओं और समुपदेशक कार्यक्रम के जरिए बाल विवाह के बुरे असर, कानूनों और लड़कियों के अधिकारों के बारे में जागरूकता फैलाई जा रही है।

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