Gondia Anti Encroachment Drive: पिछले कई सालों से गोंदिया शहर में अतिक्रमण का मुद्दा चर्चा में रहा है। हालांकि, पिछले कुछ सालों में देखा गया है कि प्रशासनिक यंत्रणा भी राजनीतिक दबाव के आगे झुक गई है। अब, नगर परिषद के नए चुने गए अध्यक्ष सचिन शेंडे के पास अतिक्रमण की शिकायतों की बौछार हो गई है। इसके बाद उन्होंने सख्त कदम उठाए हैं। इसी के तहत नप मुख्याधिकारी संदीप बोरकर ने एक पत्र जारी किया है। जिसमें कहा गया है कि 3 जून से शहर की 10 मुख्य सड़कों पर अतिक्रमण हटाया जाएगा।
शहर के प्रमुख सड़कों और गलियों में बहुत अधिक अतिक्रमण हुआ। दुकानदारों ने भी अपनी दुकानें सड़कों पर पांच फीट तक कर ली। बाजार में भी यही हाल है। इससे यातायात में बहुत दिक्कत हो रही है। इसी तरह, सीवेज ले जाने वाली नालियों पर भी पक्के ढक्कन लगा दिए गए।
इस वजह से नालियों की सफाई नहीं हो पाती और मानसून के मौसम में पानी जमा हो जाता है, जो पिछले कई सालों से देखा जा रहा है। अतिक्रमण का मुद्दा पहले भी कई बार उठ चुका है। कुछ अधिकारियों ने पुलिस की मदद से अतिक्रमण हटाने का अभियान शुरू किया था। शहर का अनुभव रहा है कि नेताओं के दबाव के कारण अगले ही दिन यह अभियान ठंडा पड़ गया। अब, नए अध्यक्ष के तौर पर सचिन शेंडे से भी अतिक्रमण हटाने की पहल नागरिकों ने की है। अध्यक्ष ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया और प्रशासन को अतिक्रमण हटाने का अभियान शुरू करने का नियोजन करने के निर्देश दिए। इसके अनुसार नप मुख्याधिकारी संदीप बोरकर ने एक पत्र जारी किया।
अतिक्रमण विरोधी अभियान 3 जून से शुरू किया जा रहा है। इसके अनुसार शहर में शामिल जगहों में जयस्तंभ चौक से नगर परिषद कार्यालय, गोरेलाल चौक से नेहरू चौक, जयस्तंभ चौक से एलआईसी चौक, स्टेडियम के सामने, अवंतीबाई चौक से साईं मंदिर, नेहरू चौक से सिविल लाइन, कालेखा कंपनी से मालधक्का रेलवे स्टेशन, लोहा लाइन, चना लाइन, प्रीतम चौक से पुलिस थाने के सामने आदि शामिल हैं।
इससे पहले भी नगर परिषद ने कई बार अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया है। हालांकि, यह एक बार का अभियान ही साबित हुआ। राजनीतिक दबाव के बाद अभियान को तुरंत रोक दिया जाता है। अब नगर पालिका ने अतिक्रमण हटाने की योजना तो बना ली है, लेकिन क्या इसमें निरंतरता रहेगी यह देखना बाकी है।
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मुख्याधिकारी, नगर परिषद संदीप बोरकर ने कहा कि राजनीतिक दबाव में न आए और सहयोग दें अतिक्रमण विरोधी अभियान 3 जून से शुरू किया जा रहा है। अतिक्रमणकारी 3 जून से पहले अपने खर्च पर अपने अतिक्रमण हटालें, अन्यथा 3 जून के बाद किसी की सुनवाई नहीं की जाएगी। और लोगों से अपिल की गई है कि वे किसी भी राजनीतिक दबाव में न आए और अभियान में सहयोग दें।