आमगांव नगर परिषद (सोर्सः सोशल मीडिया)
गोंदिया

Gondia News: आमगांव का प्रशासनिक पेच 9 साल से बरकरार, नगर परिषद के फैसले का इंतजार

Amgaon Administrative Dispute: गोंदिया जिले के आमगांव में नगर परिषद, नगर पंचायत या ग्राम पंचायत के प्रशासनिक दर्जे को लेकर विवाद करीब नौ वर्षों से जारी है।

आंचल लोखंडे

Highlights

  • आमगांव और आसपास के सात गांवों की प्रशासनिक स्थिति पर करीब नौ वर्षों से विवाद जारी है।

  • वर्ष 2015 में नगर पंचायत की अधिसूचना जारी हुई, जिसे 2016 में उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ ने रद्द कर दिया।

  • वर्ष 2017 में सात गांवों को शामिल कर नगर परिषद बनाने का फैसला भी कानूनी चुनौती में उलझ गया।

Amgaon Municipal Council: गोंदिया जिले के आमगांव नगर परिषद और आसपास के सात गांवों की स्थिति को लेकर कोई ठोस फैसला न हो पाने से नागरिक बेहद निराश हैं। पिछले नौ वर्षों से सरकार इस बुनियादी सवाल का हल नहीं निकाल पाई है कि इस क्षेत्र का प्रशासन 'नगर पंचायत', 'नगर परिषद' या 'ग्राम पंचायत' में से किसके तहत चलाया जाए।

प्रशासनिक सुस्ती, राजनीतिक उदासीनता और कानूनी पेचीदगियों का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है।

नहीं बन सकी नगर परिषद

वर्ष 2014 में सरकार ने तहसील मुख्यालयों को 'नगर पंचायत' का दर्जा देने का फैसला किया, जिसके तहत 2015 में आमगांव नगर पंचायत की अधिसूचना जारी की गई। हालांकि, स्थानीय निवासियों द्वारा 'नगर परिषद' बनाने की मांग के बाद, उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ ने 2016 में इस अधिसूचना को रद्द कर दिया।

अधिसूचना रद्द

इसके बाद, 2017 में सरकार ने आसपास के सात गांवों को शामिल करके एक 'नगर परिषद' बनाने का निर्णय लिया। इन गांवों के निवासियों ने, जो अपनी 'ग्राम पंचायत' की स्थिति बनाए रखना चाहते थे, इस फैसले को अदालत में चुनौती दी, जिसके परिणामस्वरूप अधिसूचना भी रद्द हो गई। वह बाद में विकासकार्य ठप हुए सरकार सर्वोच्च न्यायालय गई और वहां से स्थगन आदेश प्राप्त कर लिया।

कानूनी खींचतान

इस कानूनी खींचतान के कारण, यह क्षेत्र अब एक नियुक्त प्रशासक के अधीन है। चूंकि कोई निर्वाचित प्रतिनिधि नहीं है, इसलिए विकास कार्य ठप पड़ गए हैं, नागरिकों का आरोप है कि चुने हुए प्रतिनिधियों की भूमिका काफी हद तक केवल बयान जारी करने और सोशल मीडिया पर तस्वीरें पोस्ट करने तक ही सीमित रही है। ऐसा लगता है कि ये प्रतिनिधि लोगों की आवाज को सरकार तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में विफल रहे हैं।

नागरिकों को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रही

शिवसेना (उबाठा) जिला प्रमुख शैलेश जयसवाल ने कहा कि पिछले दस साली से लगातार, आमगांव का प्रशासन जो ग्राम पंचायत से नगर परिषद में तब्दील हुआ है। सरकार द्वारा नियुक्त एक प्रशासक के नियंत्रण में है। राज्य सरकार ने प्रशासक तो नियुक्त कर दिया, लेकिन बुनियादी नागरिक सुविधाओं के लिए जरूरी फड या योजनाएं उपलब्ध कराने में पूरी तरह विफल रही।

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