गड़चिरोली: धान खरीदी (सोर्स - नवभारत) 
गढचिरोली

गड़चिरोली: धान खरीदी की सीमा घटने से संकट में किसान;समर्थन मूल्य केंद्र बंद होने से व्यापारियों द्वारा लूट शुरू

Gadchiroli Paddy Procurement: केंद्र द्वारा धान खरीदी की सीमा 20 लाख क्विंटल घटाने से गड़चिरोली के खरीदी केंद्र बंद हो गए हैं। मजबूर किसान अब व्यापारियों को कम दाम में धान बेचने को मजबूर हैं।

रूपम सिंह

Maharashtra Rice Farmers Crisis News: केंद्र सरकार ने सत्र 2025-26 में राज्य में धान खरीदी की सीमा 20 लाख क्विंटल कम करने से इसका खामियाजा जिले के किसानों को भुगतना पड़ रहा है। इधर खरीदी की सीमा पूर्ण होने से समर्थन मूल्य खरीदी केंद्र बंद करने का आदेश दिया गया है। जिसके कारण किसान वर्ग पूरी तरह संकट में पड़ गए है।

किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लेकर केंद्र सरकार राज्य में धान खरीदी की मर्यादा 1 करोड़ क्विंटल से बढ़ाएं, ऐसी मांग महाराष्ट्र राज्य सहकारी पणन महासंघ के संचालक अतुल गण्यारपवार ने मुख्यमंत्री तथा जिले के पालकमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भिजवाए ज्ञापन में की है। पूर्व विदर्भ में धान फसल का प्रमुखता से उत्पादन लिया जाता है। गड़चिरोली, भंडारा, गोंदिया,

नागपुर और चंद्रपुर जिले में बड़े पैमाने पर धान की खेती की जाती है। गत वर्ष केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र के लिए 91।50 करोड़ क्विंटल धान खरीदी की मर्यादा दी थी। लेकिन इस वर्ष यह मर्यादा कम कर 72.37 लाख क्विंटल धान खरीदी की मर्यादा दी है। यानी करीब 20 लाख क्विंटल की मर्यादा कम की गई है। अब तक 72.37 लाख क्विंटल खरीदी की मर्यादा पूर्ण होने से खरीदी संस्था प्राप्त आदेश अनुसार खरीदी नहीं कर पा रहे है। जिसके कारण खरीदी केंद्र बंद पड़ गये है।

सरकार को ध्यान देने की आवश्यकता वर्तमान स्थिति में किसानों का लाखों क्विंटल धान बिक्री करने के लिए खरीदी केंद्रों पर लाकर रखा गया है। वहीं लाखों क्विंटल धान किसान के घर और गोदामों में रखा गया है।

उक्त धान किसानों को सरकार के समर्थन मूल्य खरीदी योजना अंतर्गत 2369 और 2389 कीमत में बेचना है। किसान प्रतिदिन खरीदी केंद्र में जाकर खरीदी की मर्यादा बढ़ी है क्या? इस संदर्भ में जानकारी ले रहे है। इसे लेकर अनेक जगहों पर विवाद भी हो रहे है। जिससे राज्य सरकार धान खरीदी की मर्यादा बढ़ाएं, ऐसी मांग अब जोर पकड़ रही है।

व्यापारी कर रहे किसानों से लूट

समर्थन मूल्य योजना में किसानों का धान खरीदी नहीं किया जा रहा है। इधर दूसरी ओर बाजार में धान को कम कीमत मिलने किसान अपना धान निजी व्यापारी को बेचने को तैयार नहीं है। खरीदी करने वाला व्यापारी किसानों को 1850 अथवा उससे कम दाम में धान खरीदी कर किसानों की वित्तीय लूट कर रहे है। ऐसे में मजबूरी में फंसे अनेक किसान निजी व्यापारियों को अपना धान बेचते हुए दिखाई दे रहे है।

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