(कॉन्सेप्ट फोटो) 
गढचिरोली

ई-फसल रजिस्ट्रेशन ने बढ़ाई किसानों की मुश्किलें, गड़चिरोली में 40% ही हुआ पंजीयन

Gadchiroli News: गड़चिरोली जिले में ई-फसल निरीक्षण ऐप की तकनीकी खामियों और जटिल प्रक्रियाओं के कारण अब तक केवल 40% किसानों ने पंजीकरण किया। डेडलाइन बढ़ाकर 15 सितंबर की गई है।

आकाश मसने

Kharif Crop Registration: राज्य सरकार द्वारा शुरू किए गए ई-फसल निरीक्षण कार्यक्रम ने गड़चिरोली जिले के चामोर्शी तहसील के किसानों के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खरीफ फसलों का ई-पंजीयन अनिवार्य होने के बावजूद, जटिल प्रक्रिया और तकनीकी खामियों के कारण अब तक केवल 40% किसानों ने ही पंजीकरण कराया है। किसानों को डर है कि अगर वे समय पर पंजीकरण नहीं करा पाए तो उन्हें प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान के मुआवजे से वंचित कर दिया जाएगा।

सरकार का उद्देश्य किसानों को अपनी फसल बुआई का अधिकार देना था, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। जिले में अक्सर सर्वर डाउन रहने के कारण ई-फसल निरीक्षण ऐप ठीक से काम नहीं कर रहा है। इसके अलावा, ऑनलाइन पंजीकरण के लिए मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट डाटा की जरूरत होती है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में एक बड़ी समस्या है।

तकनीकी और व्यावहारिक अड़चनें

ई-फसल पंजीयन के लिए एक एंड्राइड ऐप का उपयोग करना पड़ता है। अनेक किसानों के पास स्मार्टफोन नहीं हैं, और जिनके पास हैं, उन्हें भी ऐप पर काम करते समय कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि ऐप में खाता क्रमांक और पासवर्ड दर्ज करने के बाद भी यह ठीक से काम नहीं करता। पासवर्ड की समस्या और ऐप के नए जटिल नियम किसानों के लिए इसे समझना और भी मुश्किल बना रहे हैं, जिससे पंजीयन की प्रक्रिया बेहद धीमी हो गई है।

समस्या की जड़: अपर्याप्त सरकारी सहायता

किसानों की परेशानियों को देखते हुए सरकार ने प्रत्येक गांव में ई-फसल सहायक नियुक्त करने का आदेश दिया था। लेकिन चामोर्शी तहसील में पाँच से छह गांवों के लिए एक ही सहायक नियुक्त किया गया है, जिसके कारण सहायकों पर काम का बोझ बढ़ गया है और वे सभी किसानों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। किसान मांग कर रहे हैं कि सरकार को हर गांव में पटवारी, कोतवाल या सुशिक्षित बेरोजगार युवाओं को ई-फसल सहायक के रूप में नियुक्त करना चाहिए और उन्हें नियमित वेतन भी देना चाहिए।

किसान नामदेव बारसागडे ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा, “मेरे पास स्मार्टफोन नहीं है। दूसरे से मोबाइल मांगकर खेत में पंजीयन करने गया, तो वहां नेटवर्क नहीं था। नेटवर्क आने के बाद भी ऐप ठीक से काम नहीं कर रहा था। ऐप की जटिल शर्तों के कारण कोई भी सहयोगी हमारा पंजीयन करने के लिए तैयार नहीं हो रहा है।”

पंजीयन की अंतिम तिथि 31 अगस्त थी, जिसे बढ़ाकर 15 सितंबर कर दिया गया है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अंतिम तिथि तक जो किसान पंजीकरण नहीं करा पाएंगे, उन्हें प्राकृतिक आपदा से होने वाले नुकसान के मुआवजे के लिए अपात्र माना जाएगा। यह चेतावनी किसानों के लिए चिंता का विषय बन गई है, और वे सरकार से इस समस्या का जल्द से जल्द समाधान करने की मांग कर रहे हैं।

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