गड़चिरोली जिले की अहेरी तहसील के आलापल्ली-खांदला मार्ग करीब 22 किलोमीटर लंबा है।
खांदला समेत पांच गांवों के ग्रामीण तीन दशक से सड़क की मांग कर रहे हैं।
जंगल के रास्ते करीब 20 किलोमीटर पैदल चलकर अहेरी पहुंचे प्रदर्शनकारी।
अपर जिलाधिकारी कार्यालय के सामने शिदोरी लेकर धरना शुरू किया।
ग्रामीणों के ज्ञापन में सर्पदंश से तीन वर्षों में चार मौतों का दावा।
Gadchiroli Aheri Road Demand Protest Villagers March: गड़चिरोली जिले की अहेरी तहसील के पांच गांवों के ग्रामीण करीब 30 वर्षों से लंबित आलापल्ली-खांदला सड़क के निर्माण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। ग्रामीण जंगल के रास्ते करीब 20 किलोमीटर पैदल चलकर अहेरी पहुंचे और अपर जिलाधिकारी कार्यालय के सामने शिदोरी लेकर धरने पर बैठ गए। उनके ज्ञापन के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में सड़क के अभाव में सर्पदंश की घटनाओं में चार लोगों की मौत हुई है।
गड़चिरोली, सड़क किसी भी गांव के विकास और आपातकालीन सेवाओं तक पहुंचने की बुनियादी जरूरत है। लेकिन गड़चिरोली जिले की अहेरी तहसील के पांच गांवों के ग्रामीणों को कथित तौर पर पिछले करीब 30 वर्षों से सड़क का इंतजार है। लंबे समय से मांग पूरी नहीं होने पर ग्रामीणों ने अब आंदोलन का रास्ता अपनाया है।
आलापल्ली-खांदला मार्ग के निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीण जंगल के रास्ते करीब 20 किलोमीटर पैदल चलकर अहेरी पहुंचे। यहां उन्होंने अपर जिलाधिकारी कार्यालय के सामने शिदोरी लेकर धरना शुरू किया। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि जब तक सड़क की समस्या का समाधान नहीं होता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
खांदला ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले खांदला, चिरेपल्ली, मरनेली, कोत्तागुडम और पत्तीगांव को जोड़ने वाला आलापल्ली-खांदला मार्ग करीब 22 किलोमीटर लंबा है। ग्रामीणों का कहना है कि इस सड़क का निर्माण पिछले तीन दशकों से लंबित है।
सड़क के अभाव में इन गांवों के लोगों को आवागमन के लिए लंबा और कठिन रास्ता तय करना पड़ता है। रोजमर्रा के कामों के अलावा शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य जरूरी सुविधाओं तक पहुंचने में भी परेशानी होती है।
ग्रामीणों के अनुसार, बारिश के मौसम में स्थिति और गंभीर हो जाती है। दुर्गम रास्तों के कारण मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना चुनौती बन जाता है। आपातकालीन स्थिति में आवागमन की कठिनाई लोगों के लिए जोखिम बढ़ा सकती है।
ग्रामीणों ने अपने ज्ञापन में दावा किया है कि पिछले तीन वर्षों के दौरान सड़क के अभाव में सर्पदंश की घटनाओं में चार लोगों की मौत हुई। उनका कहना है कि यदि मार्ग का निर्माण हो जाए, तो गांवों से संपर्क बेहतर होगा और जरूरत के समय चिकित्सा सहायता तक पहुंचना आसान हो सकेगा।
लंबे समय से लंबित सड़क निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों ने प्रशासन से ठोस कार्रवाई करने की अपील की है। जंगल के रास्ते पैदल पहुंचकर धरना देने के जरिए उन्होंने अपनी समस्या की गंभीरता सामने रखी है।
अब गड़चिरोली जिले के ग्रामीणों की नजर प्रशासन की प्रतिक्रिया और सड़क निर्माण को लेकर होने वाले अगले कदमों पर है। उनका कहना है कि केवल आश्वासन से समस्या हल नहीं होगी और मार्ग निर्माण की दिशा में ठोस कार्रवाई जरूरी है।