संत तुकाराम महाराज का नेत्रसुखद रिंगण संपन्न (सौजन्यः सोशल मीडिया) 
महाराष्ट्र

विठ्ठल की भक्ती में भीगे वारकरी, संत तुकाराम महाराज का नेत्रसुखद रिंगण संपन्न

आषाढ़ी एकादशी के अवसर पर सावला विठुराया के दर्शन के लिए राज्य और देश के विभिन्न हिस्सों से रवाना हुए संतों की पालकियां शुक्रवार को वाखरी पहुंचीं।

आंचल लोखंडे

सोलापूर: आषाढ़ी यात्रा के लिए पंढरपुर के लिए रवाना हो रही संत ज्ञानेश्वर महाराज की गोल पालकी और पंढरपुर के लिए रवाना हो रही तुकाराम महाराज की खड़ी पालकी का शुक्रवार को बाजीराव विहिरी के पास स्वागत किया गया। इस दौरान वारकरी विठु माउली नाम का जाप करते हुए नृत्य में लीन थे। वारकरियों ने बाजीराव विहिरी क्षेत्र में नेत्रसुखद रिंगण का अनुभव किया।

हाईवे के फ्लाईओवर से भक्तों ने रिंगण का आनंद लिया। इस रिंगण कार्यक्रम ने सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलकर आए वारकरियों के दर्द को दूर किया। आषाढ़ी एकादशी के अवसर पर सावला विठुराया के दर्शन के लिए राज्य और देश के विभिन्न हिस्सों से रवाना हुए संतों की पालकियां शुक्रवार को वाखरी पहुंचीं।

संत ज्ञानेश्वर महाराज की पालकी भांडीशेगांव से पंढरी की ओर रवाना

इससे पहले दोपहर 1 बजे संत ज्ञानेश्वर महाराज की पालकी भांडीशेगांव से पंढरी की ओर रवाना हुई। उसके पहले संत सोपानकाका की पालकी पंढरपुर के लिए रवाना हुई। उसके बाद जगद्गुरु संत तुकाराम महाराज की पालकी पिरची कुरोली से पंढरपुर की ओर रवाना हुई। संत तुकाराम महाराज की पालकी समारोह बाजीराव विहिर के सामने खड़ी अखाड़े के लिए आया था।

हजारों वारकर बाजीराव विहिर क्षेत्र पहुंचे

फ्लाईओवर के बगल में सर्विस रोड पर लगाए गए अखाड़े को देखने के लिए वारकरों की भीड़ फ्लाईओवर पर उमड़ पड़ी थी। शाम 4 बजे खड़ा अखाड़ा पूरा हुआ। उससे पहले वारकरों ने मैदान पर गुब्बारे और सुरपत्यों के खेल के साथ ही भारुड़ा कार्यक्रम शुरू कर दिया था। अखाड़े को देखने के लिए वखारी के पालकी अड्डे पर पहुंचे विभिन्न संतों की दिंडी समारोह से हजारों वारकर बाजीराव विहिर क्षेत्र में पहुंचे थे। अगले 5 दिन अहम, कोंकण समेत घाटों में भारी बारिश, जानें कौन से जिले है अलर्ट पर

उमड़ पड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

शाम पांच बजे संत ज्ञानेश्वर माउली की पालकी अखाड़े में पहुंची। इसके बाद सेवकों ने पालकी को अपने कंधों पर रखकर ताल-मृदंग की थाप पर नृत्य किया और अखाड़े को देखने के लिए रुके वारकरियों के चारों ओर एक गोलाकार घेरा बनाया। इसके बाद गणमान्यों ने ध्वज लेकर अखाड़े की परिक्रमा पूरी की, घुड़सवारों ने घेरा बनाना शुरू किया। घोड़ों ने 3 चक्कर पूरे कर अखाड़ा पूरा किया। अखाड़ा पूरा होते ही घोड़ों के पैरों की मिट्टी माथे पर लगाने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी।

ज्ञानोबा-सोपान की मुलाकात

वेलापुर में प्रवास के बाद, माउली की पालकी का समाधि मंदिर के पास एक शानदार फेरी समारोह आयोजित किया गया था। इसके बाद, मालशिरस तालुका की सीमा के भीतर बड़े भाई सोपानदेव महाराज और संत ज्ञानेश्वर महाराज की पालकी मंच पर पालकी समारोह आयोजित किया गया था। इन दोनों पालकियों का एक-दूसरे से मिलन हुआ। आषाढ़ की अष्टमी को जब जुलूस तोंडले से निकला तो सोपानकों की पालकी और मौलियों की पालकी मालशिरस तालुका की सीमा के भीतर मिल गयी।

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