Revenue Policy Debate In Dhule: धुले महानगरपालिका की स्थायी समिति की बैठक में गणेशोत्सव के दौरान लगने वाले विज्ञापनों और बैनरों के शुल्क को लेकर तीखी बहस देखने को मिली। सदस्य धीरज कलंत्री ने राजस्व और समानता का कड़ा मुद्दा उठाते हुए प्रशासन से सवाल किया कि जब बैनर बनाने वाले अपने रेट कम नहीं करते हैं, तो फिर मनपा अपना राजस्व क्यों छोड़े?
बैठक में गणेशोत्सव के अस्थायी विज्ञापन फलक का शुल्क चार रुपये से घटाकर दो रुपये प्रति वर्गफुट करने का प्रस्ताव रखा गया था। इस पर आपत्ति जताते हुए कलंत्री ने कहा कि बैनर बनाने वाले अपना रेट कम नहीं करते हैं, बल्कि मांग बढ़ने पर वे दाम और बढ़ा देते हैं।
उन्होंने सुझाव दिया कि सार्वजनिक गणेश मंडलों के बैनरों का शुल्क घटाकर एक रुपया प्रति वर्गफुट किया जाना चाहिए, जबकि व्यावसायिक और निजी विज्ञापनों का शुल्क चार रुपये से बढ़ाकर आठ रुपये प्रति वर्गफुट कर देना चाहिए ताकि मनपा के राजस्व को नुकसान न पहुंचे।
धीरज कलंत्री ने कहा कि गणेशोत्सव के दौरान शहर में भारी संख्या में बैनर लगते हैं, जिनमें कई बैनर धार्मिक शुभकामनाओं के बजाय केवल प्रचार का माध्यम बन जाते हैं।
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि सिर्फ गणेशोत्सव के बैनरों को रियायत दी जाएगी, तो भविष्य में अन्य समाजों के धार्मिक उत्सवों, जयंती और पुण्यतिथियों पर भी ऐसी ही छूट की मांग उठेगी, जिससे सामाजिक असंतोष फैल सकता है। इसलिए नीति सभी के लिए समान होनी चाहिए।
अमोल मासुले ने भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में बैनर व स्टेज से यातायात बाधित न होने देने, विद्यार्थियों की सुरक्षा और विसर्जन मार्ग के गड्ढे भरने की मांग की। इसके अलावा, धुले मनपा में रिक्त पदों के कारण बढ़ रहे काम के बोझ को लेकर आउटसोर्सिंग के जरिए बीस पदों पर मनुष्यबल उपलब्ध कराने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई।
बैठक में मानधन पर कार्यरत विभिन्न कर्मचारियों को छह माह की पुनर्नियुक्ति को मंजूरी दी गई। इस अवसर पर मंच पर अपर आयुक्त कल्पना डहाले, स्थायी समिति सभापति लता बाई पोतदार, नगर सचिव मनोज वाघ, उपायुक्त राजेंद्र माइनकर और शहर अभियंता चंद्रकांत उगले सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
निलेश नेमाने ने गणेश मंडलों के बैनर का शुल्क एक रुपया और निजी विज्ञापनों का शुल्क चार रुपये ही रखने की मांग करते हुए सफाई और बंद स्ट्रीट लाइटों का मुद्दा उठाया। आमिर पठान ने कहा कि अनुमति शुल्क अधिक होने के कारण लोग परमिशन लेने से कतराते हैं, इसलिए कम अवधि की अनुमति और रियायती शुल्क का प्रावधान होना चाहिए।
योगिता कुटे ने कहा कि गणेश मंडल सार्वजनिक उत्सव मनाते हैं, इसलिए उन पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं डाला जाना चाहिए।