छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती (डिजाइन फोटो) 
महाराष्ट्र

छत्रपति शिवाजी महाराज: 8 पत्नियां, 3 तलवारें और वो इकलौता किला जिसे जीत नहीं सके, जानिए पूरा इतिहास

Shiv Jayanti Special: छत्रपति शिवाजी महाराज की 396वीं जयंती पर जानें उनके परिवार, 'अजेय' जंजीरा किले का रहस्य, लंदन में रखी उनकी तलवार और वर्तमान में राजनीति में सक्रिय उनके वंशजों का पूरा इतिहास।

आकाश मसने

Chatrapati Shivaji Maharaj History: छत्रपति शिवाजी महाराज को पूरे महाराष्ट्र में ‘आराध्य दैवत’ के रूप में सम्मानित किया जाता है। हर वर्ष 19 फरवरी को हिंदवी स्वराज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाई जाती है। उनके माता-पिता और पुत्रों के बारे में तो अधिकांश लोग जानते हैं, लेकिन क्या आप उनकी पत्नियों के बारे में जानते हैं?

उनकी 396वीं जयंती के अवसर पर हम उनके अद्वितीय साहस, शौर्य और नेतृत्व को स्मरण किए बिना नहीं रह सकते। ऐसे में आइए, शिव जयंती के अवसर पर हम आपको छत्रपति शिवाजी महाराज के परिवार से और उनके जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी से परिचित कराते हैं।

छत्रपति शिवाजी की कितनी पत्नियां थीं?

छत्रपति शिवाजी महाराज की 8 पत्नियां थी।

  • महारानी सईबाई (निंबालकर)
  • महारानी सोयराबाई (मोहिते)
  • महारानी पुतलाबाई (पलकर)
  • महारानी साखवरबाई (गायकवाड)
  • महारानी काशीबाई (जाधव)
  • महारानी सगुनाबाई (शिर्के)
  • महारानी गुणवंताबाई (इंगले)
  • महारानी लक्ष्मीबाई (विचारे)

छत्रपति शिवाजी महाराज के दाे पुत्र हुए संभाजी महाराज और राजाराम प्रथम। वहीं उनकी पुत्रियों का नाम सखुबाई, रानूबाई, अम्बिकाबाई, दीपाबाई, कमलाबाई तथा राजकुंवरी बाई था।

छत्रपति शिवाजी महाराज व उनकी पत्नियां

शिवाजी महाराज की भवानी तलवार कहां है?

छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रसिद्ध ‘भवानी’ तलवार के वास्तविक स्थान को लेकर अलग-अलग धारणाएँ प्रचलित हैं। आम तौर पर माना जाता है कि यह तलवार महाराष्ट्र के सातारा स्थित शाही परिवार, विशेषकर उदयनराजे भोसले के संरक्षण में सुरक्षित है। दूसरी ओर, लंदन में संरक्षित एक तलवार को अक्सर ‘जगदंबा’ या शिवाजी महाराज की किसी अन्य शाही तलवार के रूप में पहचाना जाता है। यह तलवार वर्तमान में Royal Collection Trust के पास है और इसे भारत वापस लाने की मांग समय-समय पर उठती रहती है।

छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रमुख तीन तलवारों के क्या नाम थे ?

ऐतिहासिक उल्लेखों के अनुसार, महाराज के पास तीन प्रमुख तलवारें थीं भवानी, जगदंबा और तुलजा।

  • भवानी तलवार: उपलब्ध ऐतिहासिक दस्तावेजों और स्थानीय परंपराओं के आधार पर इसे सातारा के राजघराने में सुरक्षित माना जाता है।
  • जगदंबा तलवार (लंदन): वर्ष 1875-76 में प्रिंस ऑफ वेल्स की भारत यात्रा के दौरान शिवाजी महाराज के वंशजों द्वारा भेंट की गई तलवार आज लंदन के शाही संग्रह में रखी हुई है।
  • अन्य तलवारें: भवानी और तुलजा को महाराज की युद्ध में प्रयुक्त तलवारें बताया जाता है, जिनमें से एक सतारा और दूसरी सिंधुदुर्ग किले में संरक्षित होने की मान्यता है।

छत्रपति शिवाजी महाराज ने कुल कितनी लड़ाइयां लड़ीं और कितनी जीतीं?

छत्रपति शिवाजी महाराज ने अपने लगभग 35 वर्षों के शासनकाल में 300 से अधिक किलों पर अधिकार स्थापित किया। उन्होंने मुख्यतः छापामार युद्ध नीति (गुरिल्ला वॉरफेयर) अपनाकर मुगलों और आदिलशाही जैसी शक्तिशाली सेनाओं का सामना किया और अनेक निर्णायक युद्ध जीते। उनके द्वारा लड़े गए 30 से अधिक प्रमुख युद्धों में प्रतापगढ़, कोल्हापुर और सिंहगढ़ की लड़ाइयां विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।

शिवाजी महाराज ने कौनसा किला जीता नहीं था?

छत्रपति शिवाजी महाराज ने अपने शासनकाल में अनेक दुर्गों पर विजय प्राप्त की, लेकिन कोंकण तट पर स्थित जंजीरा का किला (Murud-Janjira Fort) ऐसा एकमात्र किला था, जिसे वे अपने नियंत्रण में नहीं ला सके। यह समुद्र के बीच स्थित जलदुर्ग सिद्दी शासकों के अधीन था और अपनी सामरिक स्थिति तथा मजबूत किलेबंदी के कारण अजेय बना रहा।

मुरुड-जंजीरा फोर्ट
  • जंजीरा किला (Murud-Janjira): महाराष्ट्र के रायगड़ जिले में समुद्र के भीतर बना यह दुर्ग सिद्दियों के कब्जे में था और प्राकृतिक सुरक्षा के कारण अत्यंत सुदृढ़ माना जाता था।
  • अजेय रहने का कारण: चारों ओर गहरे समुद्र से घिरा होना और ऊंची, मोटी दीवारें इसकी सबसे बड़ी ताकत थीं। मराठा नौसेना के कई प्रयासों के बावजूद इसे जीतना संभव नहीं हो सका।
  • शिवाजी महाराज की रणनीति: जंजीरा पर नियंत्रण पाने के उद्देश्य से उन्होंने निकट ही ‘पद्मदुर्ग’ नामक समुद्री किला बनवाया, ताकि रणनीतिक दबाव बनाया जा सके। इसके बावजूद जंजीरा किला उनके लिए अभेद्य ही बना रहा।

छत्रपति शिवाजी महाराज ने हिंदवी स्वराज की स्थापना कब की थी?

छत्रपति शिवाजी महाराज ने बीजापुर सल्तनत से पूरी तरह अलग होकर 6 जून 1674 को ‘हिंदवी स्वराज’ की औपचारिक स्थापना की। इसी दिन रायगढ़ किले पर उनका भव्य राज्याभिषेक हुआ और उन्हें ‘क्षत्रियकुलावतंस श्री राजा शिवछत्रपति’ की उपाधि से सम्मानित किया गया।

शिवाजी महाराज ने औरंगजेब को कितने युद्ध में हराया ?

छत्रपति शिवाजी महाराज ने औरंगजेब की मुगल सेना को कई अहम युद्धों और छापामार अभियानों में परास्त किया। उनकी सैन्य रणनीति का आधार गोरिल्ला युद्ध नीति थी, जिसके जरिए उन्होंने कम संसाधनों में भी बड़ी ताकत को चुनौती दी। सूरत पर हमला (1664), सिंहगढ़ का युद्ध (1670), वनी-डिंडोरी का युद्ध (1670) और सलहेर का युद्ध (1672) उनकी प्रमुख सफलताओं में गिने जाते हैं।

छत्रपति शिवाजी महाराज की दहाड़ से दहला था औरंगजेब का दरबार

औरंगजेब के खिलाफ शिवाजी महाराज की प्रमुख जीत

  • सूरत पर आक्रमण (1664): इस कार्रवाई से मुगलों की आर्थिक ताकत को बड़ा झटका लगा।
  • सिंहगढ़ का युद्ध (1670): तानाजी मालुसरे के नेतृत्व में मराठा सेना ने मुगलों को हराकर किले पर कब्जा किया।
  • वनी-डिंडोरी का युद्ध (1670): इस संघर्ष में मराठों ने मुगल सेना को मात दी।
  • सलहेर का युद्ध (1672): आमने-सामने की इस बड़ी लड़ाई में मराठा सेना ने मुगलों को निर्णायक पराजय दी।

इसके अतिरिक्त, पुरंदर किले (1665) की घेराबंदी और चकस (1660) जैसी लड़ाइयों में भी शिवाजी महाराज ने अपनी सूझबूझ और रणनीतिक कौशल से मुगलों को कड़ी चुनौती दी और अपनी सैन्य क्षमता का लोहा मनवाया।

शिवाजी महाराज की मृत्यु कैसे हुई?

छत्रपति शिवाजी महाराज का देहांत वर्ष 1680 में रायगढ़ किले पर हुआ था। अलग-अलग ऐतिहासिक स्रोतों में उनकी मृत्यु तिथि 3 अप्रैल या 5 अप्रैल बताई गई है। उस समय उनकी आयु लगभग 50 से 53 वर्ष के बीच मानी जाती है। इतिहासकारों के अनुसार, वे अंतिम दिनों में पेचिश और तेज बुखार से गंभीर रूप से पीड़ित थे। कुछ विवरणों में यह भी उल्लेख मिलता है कि उन्हें करीब 12 दिनों तक रक्तस्राव की समस्या रही, जिसे उनकी मृत्यु का प्रमुख कारण माना जाता है।

छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशज कौन हैं ?

छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशज आज मुख्य रूप से महाराष्ट्र के दो प्रमुख शाही परिवारों सतारा और कोल्हापुर में विभाजित माने जाते हैं। ये दोनों घराने सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

  • सतारा घराना

सतारा शाही परिवार को शिवाजी महाराज के ज्येष्ठ पुत्र छत्रपति संभाजी महाराज की वंश परंपरा से जोड़ा जाता है।

उदयनराजे भोसले: इन्हें शिवाजी महाराज की 13वीं पीढ़ी का वंशज माना जाता है। वर्तमान में वे भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हैं। सतारा लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं और पहले राज्यसभा सदस्य भी रह चुके हैं।

शिवेंद्रराजे भोसले: सातारा शाही परिवार के सदस्य हैं। सतारा विधानसभा क्षेत्र से विधायक के रूप में सक्रिय हैं।

  • कोल्हापुर घराना

कोल्हापुर शाही परिवार का संबंध शिवाजी महाराज के दूसरे पुत्र छत्रपति राजाराम महाराज की परंपरा से माना जाता है।

शाहू छत्रपति द्वितीय: कोल्हापुर के वर्तमान छत्रपति माने जाते हैं और शिवाजी महाराज की 12वीं पीढ़ी से संबंध बताया जाता है। वर्ष 2024 में कोल्हापुर से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद बने।

संभाजीराजे छत्रपति: ये शाहू महाराज के ज्येष्ठ पुत्र हैं। पूर्व राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। वर्तमान में ‘महाराष्ट्र स्वराज्य पक्ष’ के माध्यम से सामाजिक-राजनीतिक कार्यों में सक्रिय हैं। मराठा आरक्षण और ऐतिहासिक किलों के संरक्षण जैसे मुद्दों पर मुखर रहते हैं।

मालोजीराजे छत्रपति: ये शाहू महाराज के छोटे पुत्र हैं। राजनीति में सक्रिय रहे हैं और पूर्व विधायक भी रह चुके हैं।

इसके अतिरिक्त, शिवाजी महाराज के भाई व्यंकोजी महाराज की वंश परंपरा तंजावुर (तमिलनाडु) में भी जानी जाती है। समय के साथ प्रत्यक्ष रक्त संबंध की कड़ियाँ समाप्त होने के बाद इन शाही परिवारों ने दत्तक परंपरा के माध्यम से वंश परंपरा को आगे बढ़ाया है।

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