Vinod Patil Urges Manoj Jarange: मराठा आरक्षण आंदोलन के दौरान मनोज जरांगे पाटील की भाषा को लेकर उठे विवाद के बीच मराठा क्रांति मोर्चा के समन्वयक एवं याचिकाकर्ता विनोद पाटील ने संयम बरतने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि महिला कलेक्टर हो या कोई अन्य महिला, उनके बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी करना उचित नहीं है। छत्रपति शिवाजी महाराज ने महिलाओं का सम्मान करने की सीख दी है। इसलिए आंदोलन के मूल उद्देश्य से ध्यान भटकाने वाली स्थिति पैदा नहीं होनी चाहिए।
विनोद पाटील ने कहा कि मनोज जरांगे पिछले चार दिनों से अन्न-जल त्यागकर उपवास कर रहे हैं। लगातार उपवास के कारण शारीरिक थकान और मानसिक चिड़चिड़ापन होना स्वाभाविक है। इसके बावजूद आंदोलन के दौरान शब्दों के चयन में विशेष सावधानी बरतना जरूरी है।
पाटील ने कहा कि शिवछत्रपति के स्मारक के सामने आंदोलन हो रहा है, इसलिए वहां से दिए जाने वाले प्रत्येक बयान की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। उन्होंने जरांगे से भाई और मित्र के नाते संयमित तथा उचित भाषा का इस्तेमाल करने का आग्रह किया।
पाटील ने स्पष्ट किया कि भाषा को लेकर विवाद पैदा होने से मराठा आरक्षण आंदोलन का मूल उद्देश्य प्रभावित नहीं होना चाहिए। आंदोलन की मांग पर ही पूरा ध्यान केंद्रित रहना आवश्यक है।
महिला जिलाधिकारी की नाराजगी पर पाटील ने स्पष्ट किया कि मराठा समाज का किसी भी सरकारी अधिकारी के खिलाफ रोष नहीं है। महिलाओं का सम्मान और सुरक्षा सभी की जिम्मेदारी है। मंच से इस्तेमाल किए गए कुछ शब्द जिलाधिकारी के खिलाफ नहीं थे, इसलिए अधिकारियों को किसी प्रकार का गलत अर्थ नहीं निकालना चाहिए।
आरक्षण का समाधान निकालने के लिए पाटील ने सांसद उदयनराजे भोसले और विधायक शिवेंद्रराजे भोसले से पहल करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि मराठा समाज के आरक्षण के अधिकार के लिए है। उन्होंने स्पष्ट किया कि समाज में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और राधाकृष्ण विखे पाटील के खिलाफ कोई विरोध नहीं है।