स्टाफ की कमी के कारण गुंठेवारी रेगुलराइजेशन में देरी (फोटो नवभारत)
छत्रपति संभाजीनगर

छत्रपति संभाजीनगर मनपा के फैसले के बाद भी राहत नहीं, स्टाफ की कमी से गुंठेवारी नियमितीकरण धीमा

Gunthewari Regularization: छत्रपति संभाजीनगर में गुंठेवारी दंड माफी के फैसले के एक सप्ताह बाद भी मनपा में पर्याप्त स्टाफ नहीं है। फाइल जांच और चालान प्रक्रिया धीमी होने से नागरिक परेशान हैं।

शफीउल्ला हुसैनी, आलोक उमाकृष्ण

Gunthewari Regularization Delayed Due To Staff Shortage: छत्रपति संभाजीनगर जिले के गुंठेवारी नियमितीकरण के तहत एन्सलरी और मार्जिन साइड का दंड माफ करने का फैसला हुए एक सप्ताह बीत चुका है, लेकिन मनपा प्रशासन की तैयारी के अभाव में नागरिकों को इसका लाभ तत्काल मिलता दिखाई नहीं दे रहा है।

25 अगस्त की आमसभा में दंड माफी का निर्णय होने के बावजूद नियमितीकरण कक्ष में पर्याप्त अधिकारी और कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैं। इसके चलते प्रस्ताव दाखिल करने से लेकर फाइल आगे बढ़ाने तक की प्रक्रिया धीमी हो गई है।

फाइल जमा करने के लिए भी भटक रहे नागरिक

दंड माफी के फैसले के बाद गुंठेवारी नियमितीकरण का खर्च कम होने की उम्मीद में बड़ी संख्या में नागरिक अपने प्रस्ताव तैयार कर रहे हैं। नागरिकों को उम्मीद है कि दंड में राहत मिलने से उनकी संपत्तियों का नियमितीकरण आसान और कम खर्चीला होगा।

हालांकि, मनपा के गुंठेवारी कक्ष में पर्याप्त अधिकारी और कर्मचारी उपलब्ध नहीं होने से प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। फाइलों की जांच कर उन्हें स्वीकार करने के लिए पर्याप्त मनुष्यबल नहीं होने के कारण नागरिकों को बार-बार वरिष्ठ अधिकारियों से जानकारी लेनी पड़ रही है।

कई लोगों को अपनी फाइल किस स्तर पर पहुंची है और आगे की प्रक्रिया क्या है, इसकी जानकारी के लिए मनपा कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इससे नागरिकों का समय और पैसा दोनों खर्च हो रहा है। साथ ही, काम में देरी के कारण उन्हें मानसिक परेशानी भी उठानी पड़ रही है।

कर्मचारियों की कमी से बढ़ी निजी निर्भरता

गुंठेवारी कक्ष में वास्तुविशारद और प्रभाग वाईज कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं होने का असर नियमित कामकाज पर भी पड़ रहा है। सूत्रों के अनुसार, प्रस्ताव तैयार करने और चालान बनाने जैसे महत्वपूर्ण कार्य निजी व्यक्तियों से करवाए जा रहे हैं। छत्रपति संभाजीनगर मनपा के महत्वपूर्ण कामों में बाहरी लोगों की भूमिका बढ़ने से प्रशासनिक नियंत्रण और कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

दंड माफी से नागरिकों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन पर्याप्त मनुष्यबल के अभाव में इसका वास्तविक लाभ मिलने में देरी हो सकती है। प्रशासन को तत्काल वास्तुविशारद और क्षेत्रवार कर्मचारियों की नियुक्ति कर गुंठेवारी नियमितीकरण की प्रक्रिया तेज करने की आवश्यकता है।

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