गुंठेवारी नियमितीकरण के लिए 31 अक्टूबर अंतिम तारीख तय।
महापौर समीर राजूरकर ने समय सीमा बढ़ाने से इनकार किया।
पूर्व विधायक संजय केणेकर ने अतिरिक्त मोहलत देने की मांग की।
मनपा को अब तक 6,143 प्रस्ताव प्राप्त हुए।
इन प्रस्तावों से करीब 100 करोड़ 2 लाख रुपये का राजस्व मिला।
Gunthewari Regularization Deadline: छत्रपति संभाजीनगर शहर में गुंठेवारी भूखंडों और निर्माणों को नियमित कराने के लिए अतिरिक्त समय मिलने की उम्मीद लगाए बैठे नागरिकों को झटका लगा है। महानगरपालिका ने 31 अक्टूबर को अंतिम तारीख निर्धारित किया है और इसमें किसी तरह की वृद्धि नहीं की जाएगी।
महापौर समीर राजूरकर ने गुरुवार को साफ कर दिया कि गुंठेवारी नियमितीकरण की समयसीमा आगे नहीं बढ़ेगी। जनप्रतिनिधियों की ओर से मोहलत बढ़ाने के लिए प्रयास किए जा रहे थे, लेकिन महापौर के दोटूक रुख से इन उम्मीदों पर विराम लग गया है। अब उन नागरिकों के पास समय कम बचा है, जिन्होंने अभी तक नियमितीकरण के लिए आवेदन नहीं किया है।
शहर में गुंठेवारी का प्रश्न लंबे समय से लंबित है। अनधिकृत भूखंडों और निर्माणों को नियमानुसार नियमित कराने के लिए मनपा ने नागरिकों को विशेष अवसर दिया था। इस अभियान के तहत अब तक 6,143 प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।
इनसे महानगरपालिका को लगभग 100 करोड़ 2 लाख रुपये का राजस्व मिला है। इससे एक ओर मनपा की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, वहीं दूसरी ओर अनेक नागरिकों की नियमितीकरण प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। ऐसे में अंतिम तारीख को लेकर प्रशासन और नागरिकों के बीच हलचल तेज हो गई है।
गुंठेवारी नियमितीकरण के लिए अधिक समय देने की मांग को लेकर पूर्व विधायक संजय केणेकर ने गुरुवार को महापौर समीर राजूरकर और मनपा आयुक्त अमोल येडगे से मुलाकात की। उन्होंने नागरिकों को राहत देने के उद्देश्य से अंतिम तारीख बढ़ाने की मांग रखी। कई भूखंडधारक अब भी आवेदन नहीं कर पाए हैं, इसलिए उन्हें अतिरिक्त समय दिए जाने की जरूरत जताई जा रही थी।
हालांकि, महापौर ने इस मांग पर सकारात्मक संकेत नहीं दिए। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि 31 अक्टूबर ही अंतिम तारीख रहेगी। इस निर्णय के बाद अब नागरिकों को समयसीमा के भीतर आवेदन करने के लिए तेजी दिखानी होगी। तारीख बढ़ने की उम्मीद में रुके लोगों के सामने अब तत्काल निर्णय लेने की स्थिति बन गई है।
गुंठेवारी नियमितीकरण अभियान में नागरिकों को आर्थिक राहत देने के लिए विशेष रियायतें दी गई थीं। निर्धारित नीति के अनुसार भूखंडों के विकास शुल्क में 50 प्रतिशत छूट तथा पार्श्व खुली जगह से संबंधित शुल्क और पूरक शुल्क पर दंडमाफी का प्रावधान किया गया था। इन रियायतों के कारण नागरिकों को नियमितीकरण के लिए प्रोत्साहन मिला और मनपा को भी बड़ी मात्रा में राजस्व प्राप्त हुआ।
अब 31 अक्टूबर की समयसीमा समाप्त होने से पहले पात्र नागरिकों के पास इन रियायतों का लाभ लेने का अवसर है। अंतिम तारीख के बाद इन सुविधाओं का क्या होगा, इसे लेकर अभी कोई नई घोषणा नहीं हुई है। इसलिए नागरिकों के लिए यह जरूरी है कि वे संभावित मोहलत की उम्मीद में आवेदन टालने के बजाय उपलब्ध समय का उपयोग करें।
छत्रपति संभाजीनगर शहर के विभिन्न हिस्सों में गुंठेवारी नियमितीकरण की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। हजारों प्रस्ताव प्राप्त होने के बावजूद अनेक भूखंडधारक आवेदन करने से वंचित हैं। कुछ नागरिकों को उम्मीद थी कि जनप्रतिनिधियों के प्रयासों के बाद समयसीमा बढ़ाई जाएगी। लेकिन महापौर के स्पष्ट रुख ने इन उम्मीदों को कमजोर कर दिया है।
अंतिम दिन तक कितने नए प्रस्ताव मनपा के पास पहुंचते हैं, इस पर अब सबकी निगाहें रहेंगी। आवेदन करने वाले नागरिकों को आवश्यक दस्तावेज और निर्धारित औपचारिकताएं पूरी करने पर भी ध्यान देना होगा, ताकि उनकी प्रक्रिया अधूरी न रह जाए।
छत्रपति संभाजीनगर मनपा के सामने केवल आवेदन प्राप्त करने की चुनौती नहीं है। प्रस्तावों की जांच, पात्रता का निर्धारण, मंजूरी और प्रमाणपत्रों का वितरण भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। अंतिम दिनों में आवेदनों की संख्या बढ़ने पर संबंधित विभागों पर काम का दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में प्रशासन को लंबित मामलों के निपटारे के लिए समयबद्ध व्यवस्था करनी होगी।
गुंठेवारी अभियान से मनपा को 100 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व मिला है, लेकिन नागरिकों के लिए इसका महत्व अपने भूखंड और निर्माण को नियमित कराने से जुड़ा है। अब 31 अक्टूबर की समयसीमा के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि कितने नागरिक इस अंतिम अवसर का लाभ उठा पाएंगे और मनपा आगे प्राप्त प्रस्तावों पर कितनी तेजी से कार्रवाई करेगी।