देवेंद्र फडणवीस (सोर्स: सोशल मीडिया)
छत्रपति संभाजीनगर

नई योजना का पानी शहर में दाखिल, फिर भी 10-15 दिन का इंतजार; CM फडणवीस के दौरे पर उठे तीखे सवाल

Sambhajinagar Water Supply Crisis: CM फडणवीस के संभाजीनगर दौरे के बीच जल-संकट पर उठे सवाल। नई योजना का पानी आया, पर 10-15 दिन का इंतजार बरकरार। जानिए क्यों अटका 700 किमी पाइपलाइन का काम।

शफीउल्ला हुसैनी, गोरक्ष पोफली

Fadnavis Sambhajinagar Visit Water Supply Issue: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के छत्रपति संभाजीनगर शहर दौरे के बीच शहर के लोगों की सबसे बड़ी परेशानी एक बार फिर सामने है। नई जलापूर्ति योजना का पानी शहर तक पहुंचने लगा है, लेकिन घरों के नलों तक नियमित जलापूर्ति अभी दूर की बात नजर आ रही है।

शहर के अधिकांश हिस्सों में आज भी आठ से दस दिन के अंतराल पर पानी मिल रहा है। जलवाहिनी में खराबी आने पर यही अंतर 12 से 15 दिन तक बढ़ जाता है। जिन इलाकों में जलवाहिनी का नेटवर्क नहीं पहुंचा है, वहां टैंकरों के भरोसे लोगों की प्यास बुझाई जा रही है। ऐसे में शहरवासियों का सीधा सवाल है कि जब नई योजना का पानी आ गया है, तो नलो में नियमित पानी कब आएगा?

तारीखें बढी, इंतजार खत्म नहीं हुआ

नई जलापूर्ति योजना से शहर की पानी की समस्या दूर होने की उम्मीद लंबे समय से जताई जा रही है। पहले दिसंबर 2025 तक नई योजना का पानी शहर में पहुंचाने का लक्ष्य बताया गया था। इसके बाद मुंबई में हुई समीक्षा बैठक में मार्च 2026 तक पानी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। दोनों समय-सीमाएं निकल गईं, लेकिन शहर की जलापूर्ति व्यवस्था में अपेक्षित बदलाव नहीं आया।

अब मुख्य जल वाहिनियों से पानी शहर में पहुंचने लगा है। हालांकि पानी को जलकुंभों तक पहुंचाने के बाद वहां से प्रत्येक इलाके और घर तक पहुंचाने वाली पूरी व्यवस्था अभी तैयार नहीं है। यही वजह है कि नई योजना का लाभ पूरे शहर को एक साथ नहीं मिल पा रहा है।

2,740 करोड़ की योजना, फिर भी पुरानी व्यवस्था पर निर्भरता

अमृत-2 के तहत करीब 2,740 करोड़ रुपये की लागत से तैयार की जा रही इस योजना में 1,500, 2,000 और 1,100 मिलीमीटर व्यास की बड़ी जल वाहिनियां बिछाई जा रही हैं। पहले चरण में 1,500 मिली मीटर की जलवाहिनी से हर्सूल से जटवाड़ा तक पानी पहुंचाने की योजना है।

नक्षत्रवाड़ी से जटवाड़ा के बीच करीब 18 किलोमीटर लंबी मुख्य जलवाहिनी का काम पूरा हो चुका है। इसके बावजूद पानी को शहर के प्रत्येक हिस्से तक पहुंचाने के लिए जल वाहिनियों की सफाई, मरम्मत, जोड़ने और जलकुंभों को तैयार करने का काम जारी है।

20 जलकुंभ अब भी तैयार नहीं

नई व्यवस्था को पूरी क्षमता से चलाने के लिए करीब 20 जलकुंभों का काम पूरा होना जरूरी है। सिडको-हडको क्षेत्र के एन-5 स्थित दो और एन-7 स्थित दो जलकुंभों के साथ दिल्ली गेट के जल संग्रहण केंद्र तथा हर्सूल जलशुद्धीकरण केंद्र के पास के जलकुंभ में पानी पहुंचाया गया है।

इसके बावजूद कई जलकुंभ अभी निर्माण, सफाई और वितरण से जुड़े कार्यों के कारण पूरी तरह तैयार नहीं हैं। जब तक ये जलकुंभ काम करना शुरू नहीं करते, मुख्य जलवाहिनी से आया पानी शहर के सभी हिस्सों में समान रूप से पहुंचाना संभव नहीं होगा।

700 किलोमीटर आंतरिक जलवाहिनी बाकी

नई योजना की सबसे बड़ी अड़चन जलकुंभों के साथ-साथ आंतरिक जलवाहिनी का अधूरा काम भी है। करीब 700 किलोमीटर लंबी आंतरिक जलवाहिनी का काम अभी पूरा होना बाकी है। मुख्य जलवाहिनी से आया पानी मोहल्लों और घरों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी इसी व्यवस्था पर है।

जिन इलाकों में नई जलवाहिनी बिछ चुकी है, वहां पानी पहुंचाने की तैयारी आगे बढ़ रही है। लेकिन जहां नेटवर्क अधूरा है, वहां नागरिकों को पुरानी जलापूर्ति व्यवस्था पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है।

दबाव जांच और जोड़ का काम भी बाकी

नई जलवाहिनियां बिछाने के बाद उनमें तुरंत नियमित पानी नहीं छोड़ा जा सकता। पहले उनकी दबाव जांच और सफाई करनी होती है। इससे रिसाव और अन्य तकनीकी खामियों का पता चलता है। जांच पूरी होने के बाद ही संबंधित जलवाहिनी से नियमित जलापूर्ति शुरू की जा सकती है।

फिलहाल कई नई जल वाहिनियों की जांच और सफाई का काम चल रहा है। 2,000 और 1,100 मिलीमीटर व्यास की जल वाहिनियों से जलापूर्ति शुरू करने के लिए भी आंतरिक जल वाहिनियों की जांच, जल वाहिनियों को आपस में जोड़ने और बीच के अधूरे हिस्सों को पूरा करने का काम बाकी है।

आठ-दस दिन का अंतर कब खत्म होगा?

नई योजना पूरी तरह चालू होने तक संभाजीनगर शहर की निर्भरता पुरानी जलापूर्ति व्यवस्था पर बनी रहेगी। यही कारण है कि आठ से दस दिन के अंतराल की जलापूर्ति से नागरिकों को अभी राहत नहीं मिली है। किसी मुख्य जलवाहिनी में खराबी आने पर मरम्मत के कारण पानी और देर से पहुंचता है। कई बार नागरिकों को 15 दिन तक इंतजार करना पड़ता है।

नो नेटवर्क क्षेत्रों की स्थिति और भी खराब है। यहां नियमित जलवाहिनी नहीं होने से टैंकर ही एकमात्र सहारा हैं। बढ़ती आबादी और पानी की मांग के बीच टैंकर व्यवस्था स्थायी समाधान नहीं हो सकती।

अब घोषणा नहीं, तय तारीख चाहिए

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के शहर दौरे के दौरान नई जलापूर्ति योजना की प्रगति पर चर्चा होना तय है। लेकिन अब शहरवासियों की नजर नई घोषणाओं पर नहीं, बल्कि उनके नलों में आने वाले पानी पर है। उन्हें यह जानना है कि 20 जलकुंभ कब पूरे होंगे, 700 किलोमीटर आंतरिक जलवाहिनी कब बिछेगी, जांच और जोड़ का काम कब समाप्त होगा और पूरे शहर में नियमित जलापूर्ति किस तारीख से शुरू होगी।

शहरवासियों का सवाल अब बिल्कुल साफ है नई योजना का पानी शहर में पहुंच गया, लेकिन नलों तक नियमित पानी पहुंचने की तारीख कौन बताएगा?

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