Central Team Visits Chhatrapati Sambhajinagar Jalna And Beed: मराठवाड़ा में सूखे ने खेती की तस्वीर बदल दी है। खेतों में सोयाबीन झुलस रही है, कपास और गन्ने की बढ़वार थम गई है, तो जलस्रोतों के सूखने से पेयजल का संकट गहराने लगा है। इस गंभीर स्थिति का आकलन करने के लिए केंद्रीय अंतरमंत्रालयी दल ने छत्रपति संभाजीनगर, जालना और बीड जिलों के सूखाग्रस्त क्षेत्रों का दौरा किया।
दल ने खेतों में पहुंचकर फसल क्षति देखी, किसानों से उनकी आर्थिक परेशानियां जानीं और महिला खेत मजदूरों से बातचीत कर रोजगार पर पड़े असर की जानकारी ली। प्रशासन की ओर से प्रस्तुत आंकड़ों और प्रत्यक्ष निरीक्षण के आधार पर अब केंद्र सरकार को रिपोर्ट सौंपी जाएगी। किसानों को उम्मीद है कि इस आकलन से उन्हें राहत और मुआवजा दिलाने की दिशा में ठोस निर्णय लिए जाएंगे।
केंद्रीय दल ने विभागीय आयुक्त कार्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में मराठवाड़ा की सूखे की स्थिति की जानकारी ली। दल का नेतृत्व कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के संयुक्त सचिव मुक्तानंद अग्रवाल ने किया। इसमें सुनील कुमार दुबे, डॉ। जसपाल सिंह और डॉ। साक्षी भदौरिया शामिल रहे। राज्य के कृषि सचिव परिमल सिंग भी दौरे में उपस्थित थे।
विभागीय आयुक्त जी। श्रीकांत ने बताया कि मराठवाड़ा के आठ जिलों की 76 तहसीलों में खरीफ की बुआई का क्षेत्र लगभग 52 लाख हेक्टेयर है। बारिश में लंबे अंतराल से फसलों की बढ़वार और संभावित उत्पादन पर गंभीर असर पड़ा है। जलाशयों में पानी का भंडार घटकर 30।7 प्रतिशत रह गया है। जालना, धाराशिव और लातूर जिलों में भूजल स्तर पिछले पांच वर्षों के औसत से चार से पांच मीटर नीचे चला गया है। क्षेत्र के 190 गांवों और 157 बस्तियों में टैंकरों से पानी पहुंचाया जा रहा है, जबकि 603 कुओं को अधिग्रहित किया गया है।
छत्रपति संभाजीनगर जिले के देमनी गांव में केंद्रीय दल ने किसान विकास देविदास शिंदे के 1।20 हेक्टेयर खेत में सूखी सोयाबीन की फसल का निरीक्षण किया। किसानों ने बताया कि खेत की तैयारी, बीज, खाद और मजदूरी पर खर्च करने के बावजूद बारिश नहीं होने से फसल बर्बाद हो गई। इससे परिवार का खर्च चलाने, बच्चों की पढ़ाई और कर्ज चुकाने की चिंता बढ़ गई है।
जालना जिले के बदनापुर तहसील के नाणेगांव तथा अंबड तहसील के किणगांववाड़ी और जामखेड़ में दल ने सोयाबीन, मोसंबी, अदरक, कपास और बाजरे की फसलों का जायजा लिया। कई खेतों में फसलें सूखी मिलीं और खेत तालाब खाली पड़े थे। अंबड तहसील के गलहाटी मध्यम जलाशय में भी पानी नहीं मिला। दल ने जलाशय पर निर्भर गांवों की जलापूर्ति तथा मछली पकड़कर आजीविका चलाने वाले 106 परिवारों की समस्याओं की जानकारी ली।
बीड जिले के गेवराई और बीड तहसीलों में दल ने कपास, गन्ने और सोयाबीन की फसलों का निरीक्षण किया। किसानों ने बताया कि बारिश के लंबे अंतराल से फसलों की बढ़वार रुक गई है। कई स्थानों पर फसलें सूखने से उत्पादन को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। खराब फसल पशुओं के चारे के काम भी नहीं आ रही है।
कपास के खेत में काम कर रही महिला मजदूरों से बातचीत करने के लिए केंद्रीय दल ने अपना काफिला रोका। महिलाओं से उनकी आजीविका और परेशानियों की जानकारी ली गई। सूखे से खेती का काम प्रभावित होने के कारण मजदूरी के अवसर भी घट रहे हैं, जिससे ग्रामीण परिवारों की कमाई पर असर पड़ रहा है।
किसानों ने फसल क्षति का निष्पक्ष आकलन, उचित मुआवजा, आर्थिक सहायता और पेयजल की स्थायी व्यवस्था की मांग की। प्रशासन ने दल को टैंकरों से जलापूर्ति, कुओं के अधिग्रहण, चारे की उपलब्धता और रोजगार गारंटी के तहत किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी।
केंद्रीय दल प्रत्यक्ष निरीक्षण और संबंधित विभागों से मिले आंकड़ों के आधार पर सरकार को रिपोर्ट सौंपेगा। अब किसानों की निगाहें इस रिपोर्ट के बाद होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं। उन्हें उम्मीद है कि सूखे से हुए नुकसान का आकलन राहत और मुआवजे के ठोस निर्णयों का आधार बनेगा।