कांग्रेस के मुताबिक, कुछ गांवों में 15 दिन में एक बार पानी की आपूर्ति हो रही है।
किसानों ने प्रति एकड़ 35 से 40 हजार रुपये खर्च किए, लेकिन सोयाबीन और कपास की फसलों को नुकसान हुआ।
रेहाना चिश्ती ने SIR के विरोध में 1 नवंबर को कांग्रेस के आंदोलन की जानकारी दी।
Farmers Relief Demand Rehana Chishti: मराठवाड़ा में सूखे की मार से किसान बदहाल हैं, खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद हो रही हैं और गांवों में पीने के पानी के लिए हाहाकार मचा है। कुएं और बोरवेल सूखने से इंसानों के साथ पशुओं के सामने भी पानी का संकट खड़ा हो गया है।
इसके बावजूद महाराष्ट्र सरकार को किसानों की पीड़ा की चिंता नहीं है। एक ओर महंगी गाड़ियों, निजी विमानों और हेलीकॉप्टरों का वैभव दिखाई दे रहा है, तो दूसरी ओर किसान अपनी आजीविका बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सरकार और प्रशासन की संवेदनाएं खत्म हो गई हैं।
यह तीखा आरोप कांग्रेस की महाराष्ट्र सहप्रभारी रेहाना चिश्ती ने आयोजित प्रेस वार्ता मे लगाया।प्रेस वार्ता मे प्रमुख रूप से काँग्रेस जिल्हा अध्यक्ष किरण पाटील डोणगावकर, शहराध्यक्ष एड. सय्यद अक्रम, वरिष्ठ नेता इब्राहिम पठाण, जगन्नाथ काले उपस्थित थे।
मराठवाड़ा के 11 दिवसीय दौरे में सूखा प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का जायजा लेने के बाद चिश्ती ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में संकट लगातार गंभीर हो रहा है। किसानों और खेत मजदूरों को तत्काल राहत देने के बजाय यदि सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो ग्रामीण क्षेत्रों में असंतोष बढ़ सकता है।
चिश्ती ने बताया कि मराठवाड़ा के कई गांवों में कुएं और बोरवेल सूख चुके हैं। कुछ स्थानों पर 15 दिन में एक बार पानी की आपूर्ति हो रही है। पेयजल की कमी से ग्रामीणों के साथ पशुओं की परेशानी भी बढ़ गई है।
उन्होंने आशंका जताई कि यदि अगले डेढ़ महीने में हालात नहीं सुधरे, तो नागरिक अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर सकते हैं। उन्होंने सरकार से प्रभावित गांवों में नियमित पेयजल आपूर्ति और पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था करने की मांग की।
कांग्रेस पार्टी नेता ने कहा कि किसानों ने खरीफ की बुवाई के लिए प्रति एकड़ 35 से 40 हजार रुपये खर्च किए। लेकिन बारिश की कमी के कारण सोयाबीन, कपास सहित अन्य फसलों को भारी नुकसान हुआ। खेती में लगाई गई पूंजी डूबने से किसान आर्थिक संकट में फंस गए हैं। इसके बावजूद प्रभावित किसानों को पर्याप्त फसल बीमा और आर्थिक सहायता नहीं मिलने का आरोप उन्होंने लगाया।
रेहाना ने कहा कि ऐसे गंभीर हालात में पांच हजार रुपये की सहायता पर्याप्त नहीं है। उन्होंने प्रत्येक प्रभावित किसान को एक लाख रुपये और खेत मजदूरों को 25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग की। उनका कहना है कि किसानों के साथ खेत मजदूरों की आजीविका बचाना भी सरकार की जिम्मेदारी है।
चिश्ती ने सूखा प्रभावित गांवों में रोजगार गारंटी योजना के तहत तत्काल काम शुरू करने की मांग की। खेती में काम नहीं मिलने से खेत मजदूरों की आमदनी प्रभावित हो रही है। ऐसे में रोजगार उपलब्ध कराकर ग्रामीण परिवारों को आर्थिक सहारा देना आवश्यक है। उन्होंने सरकार से सूखे की गंभीरता को देखते हुए राहत कार्यों में तेजी लाने का आग्रह किया।
महाराष्ट्र की सहप्रभारी ने कहा कि 11 दिन के दौरे में सामने आए हालात की विस्तृत रिपोर्ट राहुल गांधी सहित कांग्रेस के वरिष्ठ नेतृत्व को सौंपी जाएगी। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार से तत्काल प्रभावी निर्णय लेकर किसानों और ग्रामीण परिवारों को राहत देने की मांग की।
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर भी चिश्ती ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया में 13 करोड़ नागरिकों के नाम हटाए गए हैं। इसके विरोध में कांग्रेस एक नवंबर को दिल्ली में बड़ा आंदोलन करेगी।
उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उनके खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की। साथ ही, रोजगार के लिए दूसरे स्थानों पर जाने वाले नागरिकों के मतदान के अधिकार को लेकर चिंता जताई।