शहानुरवाड़ी की 4 हेक्टेयर 16 आर जमीन को लेकर विवाद।
अदालत के आदेश पर एक व्यक्ति के खिलाफ FIR दर्ज।
1973 के फेरबदल क्रमांक 64 से मूल काश्तकार का नाम हटाने का आरोप।
फर्जी आवेदन और स्टांप पेपर पर शपथ-पत्र तैयार करने का दावा।
शिकायत में 13 अन्य लोगों के नाम, जांच के बाद आरोपों की सत्यता स्पष्ट होगी।
Chatrapati Sambhajinagar Land Grab Case Court FIR: छत्रपति संभाजीनगर के शहानुरवाड़ी क्षेत्र में 4 हेक्टेयर 16 आर जमीन के काश्तकारी अधिकारों और राजस्व रिकॉर्ड में कथित हेरफेर का मामला सामने आया है। अदालत के आदेश पर गंगाधर गिरधारीलाल उर्फ लालराजपूत परदेशी के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। शिकायत में 13 अन्य लोगों के नाम भी हैं, जिनकी भूमिका की जांच की जाएगी।
छत्रपति संभाजीनगर के शहानुरवाड़ी क्षेत्र में करीब 4.16 हेक्टेयर जमीन के कथित हस्तांतरण को लेकर विवाद सामने आया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि मूल संरक्षित काश्तकार का नाम राजस्व रिकॉर्ड से हटाने के लिए फर्जी आवेदन और शपथ-पत्र का इस्तेमाल किया गया। पुलिस में मामला दर्ज नहीं होने पर शिकायतकर्ता ने अदालत का रुख किया। अदालत के आदेश के बाद एक व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है, जबकि 13 अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जाएगी।
छत्रपति संभाजीनगर, शहानुरवाड़ी स्थित पुराने सर्वे क्रमांक 40, नए भूमापन क्रमांक 16315 और शीट क्रमांक 182 की जमीन को लेकर यह विवाद सामने आया है। संग्राम नगर के सातारा क्षेत्र निवासी कांता उर्फ श्रीकांत कांबले (63) ने शिकायत में दावा किया है कि संबंधित जमीन के मूल संरक्षित काश्तकार ने अपने काश्तकारी अधिकार नहीं छोड़े थे। इसके बावजूद राजस्व रिकॉर्ड में फेरबदल कर जमीन के अधिकारों में बदलाव किया गया।
शिकायत के अनुसार, 1 अक्टूबर 1973 को फेरबदल क्रमांक 64 के जरिए सातबारा उतारे से मूल काश्तकार का नाम हटाया गया। शिकायतकर्ता ने इस प्रक्रिया को कथित अनियमितता का प्रमुख हिस्सा बताया है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि गंगाराम उमाप अंग्रेजी पढ़ने-लिखने में असमर्थ थे। इसका फायदा उठाकर कथित तौर पर गंगाराम परदेशी को मूल काश्तकार के रूप में पेश किया गया। इसके बाद काश्तकारी अधिकार छोड़ने के नाम पर आवेदन और स्टांप पेपर पर शपथ-पत्र तैयार किए जाने का आरोप है।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, गंगाराम उमाप ने 7 फरवरी 1990 को वसीयत बनाई थी, लेकिन काश्तकारी अधिकार छोड़ने या जमीन हस्तांतरित करने से संबंधित दस्तावेज नहीं दिए थे। इसलिए बाद के लेन-देन की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं।
शिकायतकर्ता कांबले का कहना है कि गंगाराम गिरधारी उमाप का निधन 29 जून 1993 को हुआ था। उनके अनुसार, गंगाराम ने हीराबाई उमाप को गोद लिया था, जिनका निधन 19 जुलाई 2019 को हुआ। कांबले ने दावा किया है कि दीवानी अदालत ने उन्हें और उनकी बहन विमलबाई खरात उर्फ विमलबाई कांबले को संबंधित मृत व्यक्तियों का वारिस घोषित किया है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, विभागीय आयुक्त कार्यालय में शिकायत देने के बावजूद पुलिस में मामला दर्ज नहीं हुआ था। इसके बाद उन्होंने अदालत में गुहार लगाई। अदालत के आदेश के बाद गंगाधर गिरधारीलाल उर्फ लालराजपूत परदेशी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।
शिकायत में राजरतन गोपाल, प्रेम गोपाल, वंद्रेलाल पुरुषोत्तमलाल, चिमनलाल पुरुषोत्तमलाल, सुधाकर हरिभाऊ मुले, मधुकर मुले, मनमोहनसिंह ओबेरॉय, तरविंदर सिंह धिल्लन, राजेंद्रसिंह जविंदा, रमेश नागपाल, देवानंद कोटगीर, नवीन बगड़िया और नितिन बगड़िया सहित अन्य लोगों के नाम भी शामिल हैं। पुलिस मामले में संबंधित लोगों की भूमिका और दस्तावेजों की जांच करेगी।
फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले की वास्तविक स्थिति जांच और संबंधित राजस्व रिकॉर्ड व न्यायिक दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगी।